चमोली : धार्मिक हो या साहसिक पर्यटन, यहां आपकी हर मुराद पूरी होती है

संस्कृति और धार्मिक स्थलों के मामले में चमोली जिला खासा समृद्ध है. यहां कई हिन्दू तीर्थ हैं, यहां इतने मंदिर हैं कि इसे भगवान का घर भी कहा जाता है. चमोली को खूबसूरत किलों के लिए भी जाना जाता है. दुनियाभर में मशहूर पर्यावरण आंदोलन ‘चिपको आंदोलन’ इसी जिले से शुरू हुआ था.

चमोली की प्राकृतिक खूबसूरती इसे एक अलग ही रूप देती है. फिर चाहे वह बर्फ से ढके खूबसूरत पहाड़ हों या शांत घाटियां, वाटर फॉल हों या फूलों से स‍जी घाटियां और घास के मैदान. आज के गढ़वाल को पुराणों के अनुसार पहले ‘केदारखंड’ के नाम से जाना जाता था और यहां स्वयं भगवान वास करते थे.

वेद-पुराण, रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथों की रचना इसी केदारखंड में हुई थी. माना जाता है कि भगवान गणेश ने जहां पहला वेद लिखा था वह व्यास गुफा इसी जिले में बद्रीनाथ से करीब 4 किमी दूर माणा गांव के पास है.

चमोली उत्तराखंड का दूसरा सबसे बड़ा जिला है. चमोली 1960 तक पौड़ी गढ़वाल जिले की एक तहसील थी. 24 फरवरी 1960 को इसे अलग जिला बनाया गया. चमोली जिले का जिला मुख्यालय गोपेश्वर में हैं. चमोली की उत्तरी अंतरराष्ट्रीय सीमा तिब्बत से मिलती है जो अब चीन का हिस्सा है.

इसके अलावा चमोली की सीमाएं पूर्व में पिथौरागढ़ व बागेश्वर जिले से मिलती हैं, जबकि दक्ष‍िण में अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल व पश्चिम में रुद्रप्रयाग व उत्तरकाशी से मिलती हैं.

बद्रीनाथ तीर्थ के अलावा हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी और औली ग्लेश‍ियर चमोली जिले की शान हैं. यह गढ़वाल क्षेत्र के उत्तर-पूर्व में है और यह हिमालय के मध्य में बसा है.