यहां हैं 1000 से ज्यादा ‘भुतिया’ गांव और बढ़ रहे हैं, सरकार के इस कार्य से असुरक्षित हो रही चीन सीमा

भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के मामले में उत्तराखंड सरकार ने केंद्र सरकार से साफ कह दिया है कि इस जोन की बंदिशें लागू होने से देश की चीन सीमा असुरक्षित हो जाएगी.

यहां ‘भूतिया’ कहे जाने वाले ऐसे गांवों की संख्या बढ़ रही है जिनमें अब कोई नहीं है. सबसे गंभीर बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इन गांवों में अब स्थायी पलायन हो रहा है. पहले अस्थायी पलायन होता था, लोग बर्फबारी के मौसम में दूसरे स्थानों पर जाकर गर्मियों में लौट आते थे.

केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एडीशनल सेक्रेटरी अमिता प्रसाद की अध्यक्षता में गठित एक्सपर्ट कमेटी के समक्ष भागीरथी इको सेंसिटिव जोनल प्लान के प्रस्तुतीकरण के वक्त प्रदेश सरकार की टीम ने अपना पक्ष रखा. अपर मुख्य सचिव एस. रामास्वामी की अगुवाई में टीम गई थी.

एक्सपर्ट कमेटी से यह भी कहा कि उत्तराखंड के इको सेंसिटिव जोन में दो मेगावाट के प्रोजेक्ट केंद्र ने अनुमन्य किए हैं, जबकि हिमाचल में 25 मेगावाट तक के प्रोजेक्ट लगाने की छूट दी गई है. हिमाचल और उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और जैव विविधता एक जैसी है.

भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के मामले में अभी तक क्षेत्रीय लोग समस्याएं उठाते रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार के स्तर से पहली बार यह पक्ष इतनी जोरदार तरके से केंद्र के सामने रखा गया है.

सरकार के अफसरों ने उत्तरकाशी के इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को सामने रखते हुए भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के औचित्य पर सवाल उठाए. साथ ही केंद्र के नजरिए को भी आपत्ति जताई. राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि बंदिशें लागू होने से रास्तों की मरम्मत नहीं हो पाएगी, जिससे चारधाम यात्रा में भी दिक्कतें आएंगी.

ये हैं राज्य सरकार के मुख्य बिंदु

  • उत्तराखंड में 20 डिग्री से अधिक ढलान पर रोड कटिंग की इजाजत नहीं, जबकि राष्ट्रीय मानक 40 डिग्री का है.
  • भू उपयोग बदलाव प्रतिबंधित होने से आएगी दिक्कत, विकास कार्य रुकेंगे.
  • कृषि, बागवानी का क्षेत्र निश्चित होने से विकास योजनाएं प्रभावित होंगी.
  • क्षेत्र में जनसंख्या कम हो रही है. इस वक्त 16 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है जनसंख्या.
  • क्षेत्र में पहले से ही जैविक खेती हो रही है.
  • क्षेत्र में ‘भूतिया गांवों’ की संख्या एक हजार तक पहुंच गई है.
  • 400 गांवों में 10 फीसदी से कम आबादी बची है.
  • क्षेत्र में 98 फीसदी वन क्षेत्र है, दो फीसदी राजस्व भूमि.