‘स्वदेश दर्शन’ योजना : उत्तराखंड के लिए 83 करोड़ रुपये की ‘धरोहर सर्किट’ परियोजना को मंजूरी

केंद्र सरकार ने ‘स्वदेश दर्शन’ योजना के तहत उत्तराखंड सहित पांच राज्यों के लिए 450 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है. उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

देश में थीम आधारित 13 पर्यटन सर्किट विकसित करने के मकसद से ‘स्वदेश दर्शन’ योजना की शुरुआत हुई है. पांच परियोजनाओं की मंजूरी सोमवार को केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की एक बैठक में दी गई.

उत्तराखंड में ‘धरोहर सर्किट’ के तहत जागेश्वर-देवीधुरा-कटारमल-बैजनाथ का विकास होगा. एक अधिकारी ने बताया कि स्वदेश दर्शन योजना के लिए केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ने उत्तराखंड के लिए 83 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘धरोहर सर्किट’ परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है.

एक अधिकारी ने बताया, ‘स्वदेश दर्शन योजना के लिए केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ने मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, सिक्किम और तमिलनाडु में विभिन्न सर्किटों के विकास के लिए 450 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है.’

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 70 करोड़ रुपये की परियोजना लागत से ‘रामायण सर्किट’ को मंजूरी दी गई. मध्यप्रदेश में 100 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘धरोहर सर्किट’ परियोजना को मंजूरी दी गई.

तमिलनाडु में 100 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘तटीय सर्किट’ परियोजना को मंजूरी दी गई. इसके तहत चेन्नई-मममल्लपुरम-रामेश्वरम-मनपडु-कन्याकुमारी का विकास किया जाना है.

मध्य प्रदेश के ‘धरोहर सर्किट’ के दायरे में ग्वालियर-ओरछा-खजुराहो-चंदेरी-भीमबेटका-मांडु आएंगे. परियोजना के तहत इन जगहों पर बुनियादी संरचना के विकास पर जोर दिया जाएगा.

उत्तर प्रदेश में ‘रामायण सर्किट’ के तहत चित्रकूट और श्रृंगवेरपुर का विकास होगा. इसमें अयोध्या भी शामिल होगा, जिसके लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहा है.

95.50 करोड़ रुपये की लागत से सिक्किम में ‘पूर्वोत्तर सर्किट’ को स्वीकृति दी गई, जिसमें पर्यावरण के अनुकूल लॉग हट्स, सांस्कृतिक केंद्र, पैराग्लाइडिंग सेंटर, शिल्प बाजार, आधार शिविर का विकास किया जाएगा.

‘स्वदेश दर्शन’ योजना के तहत 13 थीम आधारित सर्किटों की पहचान की गई और उनका विकास किया जाएगा. इनमें ‘पूर्वोत्तर भारत सर्किट’, ‘बौद्ध सर्किट’, ‘हिमालय सर्किट’, ‘तटीय सर्किट’, ‘कृष्ण सर्किट’, ‘रेगिस्तान सर्किट’, ‘जनजातीय सर्किट’, ‘पर्यावरण सर्किट’, ‘वन्यजीव सर्किट’, ‘ग्रामीण सर्किट’, ‘आध्यात्मिक सर्किट’, ‘रामायण सर्किट’ और ‘धरोहर सर्किट’ शामिल हैं.