पीएम मोदी का पाकिस्तान पर हमला, बोले- ‘दक्षिण एशिया में एक देश ‘आतंक के एजेंट’ फैला रहा है’

होंगझोउ।… पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि दक्षिण एशिया में ‘एक अकेला देश’ ‘आतंक के एजेंट’ फैला रहा है और उन्होंने जी-20 नेताओं से कहा कि आतंकवाद का प्रायोजन करने वालों को प्रतिबंधित और अलग-थलग किया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री के इस बयान के ठीक बाद जी-20 के सदस्य देशों ने आतंकवाद की पुरजोर निंदा की और आतंकवाद के वित्तपोषण के सभी स्रोतों, तकनीकों और माध्यमों से निपटने का संकल्प लिया.

पीएम मोदी ने पाकिस्तान का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए कहा, ‘दक्षिण एशिया में निश्चित तौर पर एक ऐसा देश है जो हमारे क्षेत्र के देशों में आतंक के एजेंट फैला रहा है.’

उन्होंने जी-20 के समापन सत्र के दौरान कहा, ‘हम आशा करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकसाथ बोलेगा और इस समस्या से लड़ने के लिए तत्कालिक आधार पर कदम उठाएगा. जो आतंकवाद का प्रयोजन और समर्थन करते हैं उनको अलग-थलग और प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. उनको पुरस्कृत नहीं किया जाना चाहिए.’

जी-20 ने दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के बाद जारी साझा बयान में कहा गया, ‘हम सभी तरह आतंकवाद और इसके स्वरूपों की कड़ी निंदा करते हैं. आतंकवाद ने अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा की है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने एवं सतत प्रगति और विकास सुनिश्चित करने के हमारे मौजूदा प्रयासों के लिए खतरा पैदा किया है.’

जी-20 देशों ने संकल्प लिया कि सभी तरह के आतंकवाद और हर जगह पैदा होने वाले आतंकवाद का मुकाबला किया जाएगा. उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण के सभी स्रोतों, तकनीकों और माध्यमों से निपटने का भी संकल्प लिया.

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद का वित्तपोषण करने की समस्या का मुकाबला करने को लेकर जी-20 की ओर से उठाए कदमों की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि सभी देशों को ‘वित्तीय कार्यबल’ (एफएटीएफ) के मानकों को पूरा करना चाहिए.

पीएम मोदी ने कहा, ‘आतंक और हिंसा की बढ़ रही ताकतें एक बुनियादी चुनौती खड़ी करती हैं. ऐसे कुछ देश हैं जो राष्ट्र की नीति को औजार के तौर पर इसका इस्तेमाल करते हैं. आतंकवाद को लेकर भारत की बिल्कुल भी बर्दास्त नहीं करने की नीति है, क्योंकि उससे कुछ भी कम पर्याप्त नहीं होगा.’

उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए आतंकवादी आतंकवादी हैं.’ मोदी का यह बयान उस वक्त आया है जब एक दिन पहले भारत और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए प्रयास तेज करने का आह्वान किया था.

जी-20 के साझा बयान में सदस्य देशों से कहा गया कि वे आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकबाला करने से संबंधित एफएटीएफ की नई समग्र रणनीति का क्रियान्वयन करें.

साझा बयान में कहा गया, ‘आतंकवाद का मुकाबला करने में हम सूचना के प्रभावी आदान-प्रदान करने, आतंकी संपत्तियों पर रोक लगाने और आतंकवाद के वित्तपोषण को अपराध की श्रेणी में रखने को प्रतिबद्ध हैं. हम एफएटीएफ मानकों एवं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2253 को वैश्विक स्तर पर त्वरित, प्रभावी और सार्वभौमिक क्रियान्वयन का आह्वान करते हैं.’

जी-20 सदस्य देशों ने यह स्वीकार किया कि यह शिखर बैठक उस वक्त हुई जब वैश्विक अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, कुछ अर्थव्यवस्थाओं में सुधार हुआ है और प्रगति के नए स्रोत पैदा हुए हैं.

साझा बयान में कहा गया है कि वित्तीय बाजार में उतार-चढ़ाव, जिंस मूल्य में उतार-चढ़ाव, सुस्त व्यापार एवं निवेश तथा उत्पादकता और रोजगार में प्रगति की धीमी गति की आंशका की वजह से सुस्ती का खतरा बना हुआ है.