एक गुफा में वैज्ञनिकों को मिली ऋग्वेद काल के 10 राजाओं की निशानियां

सांकेतिक फोटो
ऋग्वेद के सातवें अध्याय में पैसुनी नदी के किनारे जिन दस राजाओं के युद्ध का जिक्र है, उसकी कुछ निशानियां विंध्याचल क्षेत्र की एक गुफा में मिली हैं.
वैज्ञानिकों के मुताबिक इस युद्ध के बाद ही देश में आर्य और अनार्य संस्कृतियों का मिलन हुआ था. हाल ही में एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने विंध्याचल इलाके की एक बड़ी गुफा की चट्टानों पर बनी इन पेटिंगों को देखा.
एएसआई टीम को हुसंगाबाद से 40 किलोमीटर दूर बुधनी तहसील की नकटी तलाई के पास गुफा में ये रॉक पेंटिंग मिली हैं. यह गुफा डेढ़ फुट लंबी और चार फुट चौड़ी है. इसी की चट्टानों पर विभिन्न प्रकार के युद्ध दृश्यों की पेंटिंग बनी हुई हैं.
ये पेंटिंग हजारों साल पुरानी ऋग्वेद कालीन मानी जा रही हैं. इन पेंटिग में धनुष-बाण, भाला और तलवारों से युद्ध करते हुए दिखाया गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्यों के आने के बाद ही तलवार का इस्तेमाल शुरू हुआ था. अनार्य उस वक्त भी तीर, भाला से युद्ध किया करते थे. आर्यों के समय में ही युद्ध में घोड़ों का इस्तेमाल बढ़ा था.
वैसे तो नकटी तलाई की इस गुफा में लोग अर्से से इन पेंटिंग को देख रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने इनका अध्ययन पहली बार शुरू किया है. इन पेंटिंग को संरक्षित करने की दिशा में भी एएसआई ने प्रयास शुरू किए हैं.
वैज्ञानिकों का तर्क है कि दस राजाओं के युद्ध के बाद एक बड़ा बदलाव आया था. इस युद्ध की चर्चा हर जगह रही. इससे प्रभावित होकर ये पेंटिंग बनाई गई होंगी. उस वक्त विंध्य और सतपुड़ा रेंज की गुफाओं में प्राचीन काल के लोगों के वासस्थल रहे हैं.