उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम. जोसफ का ट्रांस्फर दबाकर बैठी है केंद्र सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल मई में उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के एम. जोसफ का आंध्र प्रदेश-तेलंगाना हाईकोर्ट में तबादला करने की सिफारिश थी, लेकिन अभी तक सरकार ने इस तरफ कोई कदम नहीं उठाया है.

इसके आलावा उच्चतर न्यायपालिका में रिक्तियों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के चिंता जताने के कुछ ही दिन बाद विधि मंत्रालय के आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में छह हाईकोर्ट बिना नियमित मुख्य न्यायाधीश के काम कर रहे हैं. वहीं, 478 न्यायाधीशों के पद खाली हैं.

आंकड़ों के अनुसार आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, मध्यप्रदेश, मणिपुर, सिक्किम और त्रिपुरा में एक अगस्त तक पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश नहीं थे.

आंकड़ों के अनुसार 24 हाईकोर्ट 601 न्यायाधीशों के साथ काम कर रहे हैं, जबकि उनकी स्वीकृत क्षमता 1079 है. फिलहाल 478 न्यायाधीशों की कमी है. न्यायाधीशों की यह कमी ऐसे समय में है जब इन अदालतों में तकरीबन 39 लाख मामले लंबित हैं.

सरकार ने यह भी कहा कि हाईकोर्टो में जून 2014 में न्यायाधीशों की स्वीकृत क्षमता 906 थी, जो इस साल जून में बढ़कर 1079 हो गई.

न्याय प्रदान करने की व्यवस्था के चरमराने की बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त को हाईकोर्टों में मुख्य न्यायाधीशों और अन्य न्यायाधीशों के तबादले और नियुक्ति के संबंध में कॉलेजियम के फैसलों को लागू नहीं करने पर सख्त संदेश देते हुए कहा था कि वह अवरोध बर्दाश्त नहीं करेगी और उसे जवाबदेह बनाने के लिए हस्तक्षेप करेगी.

बढ़ती रिक्तियों पर चिंता जताते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था कि ऐसा लगता है कि केंद्र कॉलेजियम के फैसले के अनुसार न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण नहीं करके न्यायपालिका को ठप करना चाहता है.

कॉलेजियम की जो प्रमुख सिफारिश सरकार के पास लंबित है उसमें उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के एम. जोसफ का आंध्र प्रदेश-तेलंगाना हाईकोर्ट में तबादला करने को लेकर है. यह सिफारिश मई की शुरुआत में की गई थी.

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत क्षमता प्रधान न्यायाधीश सहित 31 है. उसमें भी तीन रिक्तियां हैं.