मुख्यमंत्री ने केंद्र से मांगे 732 करोड़ रुपये, 951 करोड की ‘नमामि गंगे’ योजनाओं की डीपीआर पर अनुमोदन भी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुवार को केंद्रीय जल संसाधन और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती से रामनगर, सितारगंज और काशीपुर में सीवेज प्रदूषण से संबंधित कार्यों के लिए ‘नमामि गंगे’ के तहत प्रदेश सरकार द्वारा भेजी गई 951.58 करोड़ रुपये की 25 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को अनुमोदन देने का अनुरोध किया.

उमा भारती से नई दिल्ली में मुलाकात के दौरान हरीश रावत ने कहा कि इन क्षेत्रों में सीवेज प्रदूषण दूर करने हेतु किए जाने वाले कार्यों के लिए ‘नमामि गंगे’ के तहत 951.58 करोड रुपये की 25 परियोजनाओं का डीपीआर केंद्र को भेजा जा चुका हैं. हालांकि, उनका अनुमोदन अभी तक केंद्र से नहीं मिला है.

अस्थायी राजधानी देहरादून में जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, हरदा ने मुलाकात के दौरान अपने एक पूर्व पत्र का भी जिक्र करते हुए उनसे उत्तराखंड में निर्माणाधीन केंद्र पोषित परियोजनाओं हेतु केंद्रांश की बची धनराशि 732.23 करोड़ रुपये देने का भी अनुरोध किया.

रावत ने बताया कि उत्तराखंड के पुनर्निर्माण हेतु केंद्र पोषित योजनाओं के तहत विशेष पैकेज के माध्यम से योजना आयोग ने बाढ नियंत्रण हेतु 879.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी, जिससे राज्य सरकार द्वारा 657.79 करोड रुपये की लागत के 54 बाढ सुरक्षा के कार्य कराए जा रहे हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इस संबंध में बची धनराशि जारी करने का अनुरोध किया और कहा कि धनराशि अवमुक्त न होने के कारण न केवल कार्य अधूरे पड़े हैं बल्कि इससे व्यय की गई धनराशि का भी कोई लाभ प्राप्त नहीं हो पा रहा है.