मसूरी गोलीकांड की 22वीं बरसी आज : यहां 6 राज्य आंदोलनकारी हुए थे शहीद

पहाड़ों की रानी मसूरी में दो सितंबर 1994 को हुए गोलीकांड को उस पीढ़ी के लोग शायद ही कभी भूल पाएंगे. खटीमा गोलीकांड जिसमें 7 राज्य आंदोलनकारी शहीद हो गए थे, उसके ठीक एक दिन बाद दो सितंबर 1994 को पुलिस की गोली से मसूरी में भी 6 राज्य आंदोलनकारी शहीद हो गए थे.

बता दें कि इस गोलीकांड में एक डीएसपी भी शहीद हो गए थे. राज्य आंदोलनकारी कहते हैं कि जिन मुद्दों को लेकर तत्काली उत्तर प्रदेश शासन से लड़ाई थी, आज उत्तराखंड बनने के 16 साल बाद भी उन मुददों का समाधान नहीं हो पाया है.

वरिष्ठ आंदोलनकारी जयप्रकाश उत्तराखंडी कहते हैं कि मसूरी की मालरोड झुलाघर के पास राज्य आदोलनकारी दो सितंबर 1994 को खटीमा गोलीकांड के विरोध में नारेबाजी कर रहे थे. लेकिन पुलिस ने आंदोलन को कुचलने के लिए पहले से ही तैयारी कर ली थी.

लोग नारेबाजी कर रहे थे कि पुलिस ने लाठियां बरसाने के साथ ही गोली चलानी शुरू कर दी, जिसमें छह राज्य आंदोलनकारी शहीद हो गए. साथ ही 48 लोगों को पकड़कर बरेली जेल भेजा गया. सैकड़ों लोग घायल हो गये थे.

राज्य आंदोलनकारी देवी गोदियाल कहते हैं कि जल, जंगल, जमीन और पहाड़ से पलायन के मुद्दे को लेकर राज्य की लड़ाई लड़ी गई थी. लेकिन आज सभी मुद्दे पहाड़ के नेताओं की महत्वकांक्षा के सामने ही दम तोड़ चुके हैं.

शहीद हंसा धनाई के पति भगवान सिंह धनाई कहते हैं कि राज्य सिर्फ नेताओं की ऐशगाह के लिए बना है. सोलह साल में आठ मुख्यमंत्री बने हैं. पहाड़ के विकास के लिए कोई भी पार्टी गंभीर नहीं है.

पलायन बदस्तूर जारी है, कोई ठोस नीति नहीं बनी है. नेता कुर्सी के लिए लड़ रहे हैं शहीदों के सपने पूरे करने की घोषणा हर साल मसूरी शहीद स्थल से होती है, लेकिन पूरा करने का दिल किसी नेता या सरकार में नहीं है.