यूएपीएमटी एडमिशन स्कैम : कई राज्यों तक जुड़े हैं मुन्नाभाईयों के तार

यूएपीएमटी परीक्षा से जुड़े देशभर में मुन्ना भाइयों के गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद लगातार कई चौकाने वाले सच सामने आ रहे हैं. मामले की जांच कर रही एसआईटी के टारगेट पर अब छात्र ही नहीं बल्कि यूनिवर्सिटी के कर्मचारी भी आ चुकें हैं. एग्जाम कराने वाली एजेन्सी भी एसआईटी के शिकंजे में है.

बता दें कि उत्तराखंड आयुष प्री-मेडिकल टेस्ट (यूएपीएमटी) परीक्षा में कितने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है, इसका खुलासा लगातार एसआईटी की जांच में सामने आ रहा है.

देहरादून में 7 अगस्त को 12 छात्रों की गिरफ्तारी के बाद गिरोह के तार हरिद्वार और श्रीनगर तक जुड़े पाए गए. जांच आगे पहुंची तो मामला यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले तक पहुंच गया. कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं. जांच में सामने आ रहा सच और भी चौकाने वाला है. इसलिए विश्वविद्यालयों के कर्मचारी भी एसआईटी की जांच के दायरे में पहुंच गए हैं.

बड़ा सवाल अब उठ रहा है कि परीक्षा के बाद कॉउन्सलिंग और एडमीशन में कर्मचारियों का क्या रोल रहा? जिस एजेन्सी पर एग्जाम कराने की जिम्मेदारी थी, उसकी क्या भूमिका है?

मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन विश्वविद्यालयों के मुकदमों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया. पुलिस और एसआईटी को कई गुमनाम पत्र भी मिले, जिनमें इस गिरोह के बारे में कई खुलासे किए गए हैं. एसआईटी ने गुमनाम पत्रों को भी जांच का हिस्सा बनाया तो एक के बाद एक खुलासे हो रहे है.

यह भी देखने में आ रहा है कि एसआईटी ने यूनिवर्सिटी से कुछ जानकारियां मांगी तो यूनिवर्सिटी ने सहयोग नहीं किया. इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता है कि मुन्नाभाइयों का सहारा लेकर न जाने कितने डॉक्टर प्रैक्टिस में होंगे. अब देखना यह होगा कि एसाईटी अपने जांच के दायरे को कितना आगे बढ़ाती है और कितने शिकंजे में फंसते हैं.

देहरादून के एसएसपी सदानंद दाते ने बताया है कि बहुत जल्द एसआईटी की टीम नोएडा और दूसरे राज्यों में भी जाकर पड़ताल करेगी. बताया गया है कि हरिद्वार ऋषिकुल यूनिवर्सिटी से जितने छात्र निष्कासित हुए हैं, उनकी लिस्ट और जानकारी एसआईटी को मिल चुकी है. वहीं तमामा दस्तावजों के आधार पर पुलिस जांच कर रही है. हरिद्वार पुलिस को भी अब जांच में शामिल किया गया है.