खटीमा गोलीकांड के 22 साल, आज भी अधूरे हैं आंदोलनकारियों के सपने

नैनीताल में गुरुवार को आंदोलनकारियों ने तल्लीताल में सभा करके खटीमा गोलीकांड के शहीदों को श्रृद्धांजलि दी. इस दौरान गोली चलाने वाले आरोपियों पर एक बार फिर कार्रवाई की मांग की गई है. गांधी चौक पर आयोजित सभा में शामिल लोगों ने कहा की पहाड़ के लोगों ने अपनी शहादत देकर राज्य का निर्माण किया था, लेकिन आज तक उनके सपने अधूरे ही रह गए हैं.

सभा में कहा गया, बीजेपी और कांग्रेस ने जिस तरह से राज्य का विनाश किया है, उसके लिए जनता को आगे आना चाहिए. गौरतलब है कि 1 सितंबर ही के दिन राज्य निर्माण के लिए आन्दोलन कर रहे आन्दोलनकारियों पर 1994 में गोलिया चलाई गई थीं. जिसमें 7 लोगों मौत हो गई थी. खटीमा गोली कांड के सभी शहीदों को नैनीताल में श्रृद्धांजलि दी गई.

इस दौरान उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के पूर्व अध्यक्ष नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि उत्तराखंड बने 16 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन आज तक शहीदों के सपने पूरे नहीं हो सके हैं. आज भी सरकारों ने ठोस कदम इस ओर नहीं उठाए.

1 सितम्बर 1994 को हजारों की संख्या में स्थानीय लोग पृथक राज्य की मांग के लिए सड़कों पर उतरे थे. जिसमें महिलाएं अपने बच्चों तक को लेकर सड़कों पर उतर आयी थीं. खटीमा गोलीकांड की आग खटीमा से लेकर मसूरी और मुजफ्फनगर तक फैल गई थी.

खटीमा गोलीकांड में सात लोंगों को अपनी जान गवानी पड़ी. वहीं 165 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल भी हुए थे. उसके बावजूद उत्तराखंड आंदोलन के प्रमुख आंदोलनकारी शेर सिंह डिगरी इन सोलह सालों में अभी तक शहीदों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बनने की बात कर रहे हैं.

महिलाओं पर पुलिस ने अत्याचार किए, उसके बावजूद महिलाएं आज भी राज्य में अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही हैं. उतराखंड की जनता को अपने सपनों के इस उतराखंड के बनने का अभी इंतजार करना पड़ेगा. अब देखना होगा की सत्ता पर काबिज सरकारें इसे कब पूरा करती दिखती हैं.

खटीमा गोलीकांड के अमर शहीदों के नाम :

  • भगवान सिंह सिरौला, ग्राम श्रीपुर बिछुवा, खटीमा
  • प्रताप सिंह, खटीमा
  • सलीम अहमद, खटीमा
  • गोपीचन्द, ग्राम रतनपुर फुलैया, खटीमा
  • धर्मानन्द भट्ट, ग्राम अमरकलां, खटीमा
  • परमजीत सिंह, राजीवनगर, खटीमा
  • रामपाल, बरेली