आजादी के 70 साल बाद सड़क को मंजूरी मिली तो ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल गए

देश को आजाद हुए 70 साल बीत चुके हैं, लेकिन यहां के हुक्मरान आज तक कई इलाकों को सड़क मार्ग से नहीं जोड़ पाए हैं. यही नहीं कई इलाकों तक तो देश की सरकारें बिजली और पानी तक नहीं पहुंचा पाई हैं. ऐसे में उन इलाकों तक पहली बार यह चीजें पहुंचें तो वहां के लोगों की खुशी सच में देखने लायक होती है.

देहरादून जिले में मसूरी-खट्टा पानी मोटर मार्ग निर्माण की स्वीकृति मिलने से क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर देखने को मिल रही है. मसूरी से लगे एक दर्जन से अधिक गांव जिनमें नौथा, जिन्सी, खट्टापानी, जोहड़ी, तुनेटा, कफोल्टी, लैदूर, मवाणा, कोल्टी, मतौली, कांडाजाख, लगड़ासू सहित दो दर्जन गांव देश की आजादी के 70 साल से आज तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ सके थे.

इतिहासकार जयप्रकाश उत्तराखंडी ने बताया कि मसूरी को अग्रेजों ने 1840 में बैलगाङी और 1920 में सड़क सुविधा से जोड़ दिया था, लेकिन मसूरी से लगे इन गांवों के लोग हर रोज पांच से पन्द्रह किलोमीटर तक पैदल चलकर मसूरी पहुंचते हैं. सड़क न होने से क्षेत्र के लोग सबसे ज्यादा उच्च शिक्षा से वंचित रहे हैं.

क्षेत्र की सभासद बीना पंवार ने कहा कि गांवों में कोई बीमार पड़ जाए तो लोग मरीज को कंधे पर कुर्सी के सहारे सड़क तक पहुंचाते हैं. सड़क स्वीकृत होने पर बीना पंवार ने राज्य सरकार धन्यवाद दिया. स्थानीय निवासी कुलदीप रावत ने कहा कि आजादी के बाद से पहली बार किसी सरकार ने उनकी सुध ली है.

सङक बनने के बाद से क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थय, पर्यटन की गतिविधियां भी बढ़ेगी, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी मिलेगा.