…तो खंडूरी को राज्य की राजनीति से अलग करके अंदरूनी गुटबाजी से मुक्ति पाएगी बीजेपी!

उत्तराखंड बीजेपी में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है. पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, बीसी खंडूरी और रमेश पोखरियाल निशंक के अपने-अपने गुट हैं. तीनों ही गुट अपने-अपने नेता को आगामी विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री बनाने के लिए जी जान से जुटा हुआ है.

ऐसे में सुगबुगाहट यह भी है कि बीजेपी पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद बीसी खंडूरी को राज्यपाल बनाकर उत्तराखंड की सक्रीय राजनीति से दूर रखने की तैयारी कर रही है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या बीसी खंडूडी, मोदी-शाह वाली बीजेपी की स्कीम में फिट नहीं बैठ रहे हैं?

चुनाव से ठीक पहले प्रदेश बीजेपी की अंदरुनी राजनीति में एक नई हलचल मच गई है. दिल्ली में सुगबुगाहट के बाद चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री जनरल बीसी खंडूरी को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया जा सकता है.

इन अटकलों के बाद पार्टी के भीतर ये बहस भी छिड़ गई है कि क्या ऐसे वक्त में जब बीजेपी चुनावी मोड में है, तब खंडूरी को राज्य से दूर करना पार्टी हित में रहेगा? वह भी तब जब प्रदेश बीजेपी और संघ के सर्वे के मुताबिक लोगों का झुकाव खंडूरी की तरफ दिख रहा हो!

असल में बीजेपी पूरी तरह चुनावी मोड़ में है, लेकिन पार्टी सूबे में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का चेहरा देने से बच रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी ही है. खंडूडी का चेहरा लोकप्रिय होने के साथ ही उनकी छवि भी पार्टी और जनता के बीच बेदाग मानी जाती है. लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश बीजेपी की खेमेबाजी बीजेपी हाईकमान को खटक रही है. खड़ूरी, कोश्यारी और निशंक में बंटी उत्तराखंड बीजेपी को एकजुट करने की कोशिश की जा रही है.

यहां सवाल खड़़ा हो रहा है कि क्या खंडूरी, पीएम मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की स्कीम में फिट नहीं बैठ रहे हैं? बीजेपी के भीतर चर्चा है कि 75 वर्षीय फार्मूले में खंडूरी फिट नहीं बैठते हैं. हालांकि पार्टी नेता भी आला कमान को खंडूरी के नाम का फीडबैक दे चुके हैं और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी ये जान चुके हैं.

सत्ताधारी कांग्रेस के दिग्गज भी यही मानते हैं कि उनके लिए असली चुनौती बीजेपी नहीं बल्कि खंडूरी हो सकते हैं. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि अपने ही चाबुक से प्रदेश बीजेपी को हांक रहा बीजेपी आलाकमान क्या इस वक्त खंडूरी को सूबे की सियासत से किनारे करने का रिस्क लेगा.

उधर सूत्रों की मानें तो हाल ही में दिल्ली में हुई बीजेपी की बैठक में अमित शाह ने साफ कहा कि उत्तराखंड में सरकार बनें या न बनें, लेकिन वे उत्तराखंड में पार्टी की गुटबाजी खत्म करके रहेंगे. माना जा रहा कि खंडूरी के बाद कोश्यारी और निशंक को भी सक्रिय राजनीति से दूर रखने के लिए कोई सम्मान जनक पद दिया जा सकता है. बताया जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान उत्तराखंड बीजेपी की गुटबाजी को खत्म करने के लिए इसी फॉर्मूले पर काम कर रहा है.