हरिद्वार : साधुओं से पिट रहे युवक को तो ‘नेताजी’ ने बचा लिया, खुद पिट गए

हरिद्वार में एक युवक की पिटाई कर रहे जूना अखाड़े के साधुओं को टोकना बीजेपी के स्थानीय नेता को भारी पड़ गया. अखाड़े के साधुओं ने बीजेपी नेता और व्यापार मंडल के जिला प्रवक्ता विनोद मिश्रा को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा. साधुओं ने उनके कपड़े तक फाड़ डाले. बीजेपी नेता ने किसी तरह से भागकर जान बचाई.

इसके विरोध में व्यापारियों ने पहले कोतवाली में हंगामा किया और फिर सड़क पर जाम लगा दिया. विनोद मिश्रा की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. जानकारी के अनुसार बीजेपी नेता विनोद मिश्रा रविवार सुबह माया देवी मंदिर में दर्शन के लिए गए थे. दर्शन कर लौटते समय भैरव अखाड़ा आश्रम के पास कुछ साधु संत एक युवक विकास को पीट रहे थे.

बीजेपी नेता ने बीच बचाव करते हुए साधु संतों को रोकना चाहा. आरोप है कि युवक को छोड़कर साधु संत उल्टा बीजेपी नेता पर ही पिल गए. साधुओं ने बीजेपी नेता को दौड़ा-दौड़ा कर पीटते हुए कपड़े भी फाड़ दिए. जैसे-तैसे बीजेपी नेता ने भागकर अपनी जान बचाई.

विनोद मिश्रा के समर्थन में बड़ी संख्या में व्यापारी कोतवाली पहुंचे और हंगामा किया. कोतवाली से जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराने के बाद व्यापारी नेता को लेकर व्यापारी वर्ग ने पोस्ट ऑफिस तिराहे पर जाम लगाकर आरोपी साधु संतों की गिरफ्तारी की मांग उठाई.

कोतवाली प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह भदौरिया ने आश्वासन दिया कि वीवीआईपी कार्यक्रम के खत्म होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद ही व्यापारियों ने जाम खोला. इधर, बीजेपी नेता की ओर से जूना अखाड़े के कोठारी, संत मोहन पुरी समेत कई संतों के खिलाफ मारपीट, गाली गलौच, हत्या की धमकी देने सहित प्रभावी धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया.

प्रदर्शनकारियों में व्यापारी नेता संजीव नैय्यर, सुरेश गुलाटी, राजन मेहता, कमल बृजवासी, विकास तिवारी, दीपक गोस्वामी, संदीप शर्मा, महेंद्र सिंह रावत, शिवकुमार कश्यप, अभिषेक गौड़, आदित्य राज सैनी समेत अनेक लोग शामिल रहे.

हरिद्वार कोतवाली में एक स्वर में व्यापारी वर्ग यही बोलता रहा कि यह साधु संत नहीं बल्कि गुंडे है. पूर्व में भी कुछ साधुओं ने दिल्ली के एक यात्री परिवार को बेरहमी से पीटा था. भल्ला रोड पर दुकानदारों से भी मारपीट की गई थी. हर कोई साधु-संतों की दबंगई के किस्से सुनाता रहा.

एक तरफ जहां व्यापारी वर्ग साधु संतों के खिलाफ भड़ास निकाल रहे थे तो कुछ व्यापारी अंदर खाने मामले को सुलझाने में भी जुट गए थे. इसकी एक बड़ी वजह धार्मिक संपत्तियों पर कई बड़े व्यापारी नेताओं का किरायेदार होना है. ये व्यापारी नेता जूना अखाड़े से सीधे जुड़े हैं और रविवार को भी मामले के बाद बड़े नेता साधु संतों की ढाल बनकर अंदरखाने समझौता कराने में जुट गए.