अलकनंदा नदी चमोली में अपने उदगम से जिले की सीमा तक खुले में शौच से मुक्त हुई

‘नमामि गंगे’ योजना के प्रभाव से उत्तराखंड में चमोली जिले में गंगा की मुख्य धारा अलकनंदा अपने उदगम से लेकर जिले की सीमा पर स्थित घोलतीर व सारी गांव तक पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्ति वाले क्षेत्र में बदल गया है.

अलकनंदा के उदगम के पास माणा गांव, बद्रीनाथ पुरी से लेकर चमोली जिले में अलकनंदा के दोनों तटों पर बसे 30 गांवों की सभी ग्राम पंचायतें खुले में शौच से मुक्ति वाले गांवों में बदल गई हैं.

चमोली के डीएम विनोद कुमार सुमन ने बुधवार को संवाददाताओं से इस उपलब्धि को साझा करते हुए बताया कि ‘नमामि गंगे’ योजना के तहत बद्रीनाथ धाम के पास से प्रवाहित होने वाली अलकनंदा नदी के दोनों तटों पर बसी बस्तियों को खुले में शौच से मुक्ति की योजना विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर शुरू की गई और 25 दिन के भीतर इन बस्तियों के शौचालय विहीन 811 परिवारों ने अपने-अपने शौचालय बना दिए.

उन्होंने बताया कि अलकनंदा के अलावा चमोली देश में अकेला ऐसा जिला है, जिसके दो विकासखण्ड पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं. चीन सीमा से जुड़ा जोशीमठ विकास खण्ड और सुदूरवर्ती देवाल विकास खण्ड में हर व्यक्ति को शौचालय की सुविधा उपलब्ध हो गई है और खुले में शौच से मुक्ति मिल गई है.

सुमन ने कहा कि चमोली को इस साल दिसंबर तक पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में अभियान के रूप में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें जिले के सभी विभागों के साथ जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों की मदद से जन जागरुकता के द्वारा यह लक्ष्य पाने के प्रयास किए जा रहे हैं.