देहरादून : गेस्ट टीचरों ने किया सचिवालय कूच, पुलिस के साथ धक्का-मुक्की

उत्तराखंड में गेस्ट टीचरों ने फिर से राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. शनिवार को गेस्ट टीचरों ने अपनी नियुक्ती की मांग को लेकर सचिवालय कूच किया, हालांकि पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें सचिवालय से पहले ही बैरिकेटिंग करके रोक दिया गया.

इस दौरान पुलिस प्रशासन और अतिथि शिक्षकों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की भी चली, जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने गेस्ट टीचरों पर बल प्रयोग भी किया. पुलिस के बल प्रयोग के बाद अतिथि शिक्षक मौके पर ही धरने पर बैठ गए.

दरअसल हाईकोर्ट के निर्णय के बाद से ही गेस्ट टीचर अब सरकार पर अपने भविष्य को लेकर दबाव बनाने में जुट गए हैं. गेस्ट टीचरों का कहना है कि भले यह व्यवस्था केवल 31 मार्च 2017 तक रहने वाली है, लेकिन सरकार को चाहिए कि एक्ट में संशोधन कर उन्हें प्रक्रिया में लाकर स्थाई नियुक्ती दी जाए, जैसे कि शिक्षा मित्रों को दी गई है.

इसी मांग को लेकर अब शिक्षक संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. शनिवार को भी राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों से आए सैकड़ों शिक्षकों ने सचिवालय का रुख किया. रैली निकालकर अतिथि शिक्षक सचिवालय की ओर बढ़े तो पुलिस बल ने भी उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड लगाकर व्यस्था कर दी. जैसे ही शिक्षक बैरिकेडिंग के पास पहुंचे और उसे पार करने के लिए पुलिस प्रशासन के साथ धक्का-मुक्की होने लगी. पुलिस को उन्हें तितर-बितर करने के लिए हल्के बल का भी प्रयोग करना पड़ा.

जितना गुस्सा अतिथि शिक्षकों को विभाग पर है, उससे कहीं अधिक नाराजगी उनके भीतर सरकार और खास तौर से शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी को लेकर है. दरअसल अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि राष्ट्रपति शासन के दौरान शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी अतिथि शिक्षकों के आंदोलन में बिना बुलाए कूद पड़े और यहां तक कि उन्होंने सड़क पर ही रात भी बिताई.

सहानुभूति दिखाने मुख्यमंत्री हरीश रावत भी अतिथि शिक्षकों के साथ ही रात धरने पर बैठे रहे, लेकिन अब जब फिर से अतिथि शिक्षक सड़क पर हैं तो शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री दोनों को नजर नहीं आ रहे हैं.