कहीं भीमलाल का अनशन विधानसभा टिकट के लिए तो नहीं, राहुल गांधी से करना चाहते हैं ‘मन की बात’

कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों साफ कर दिया है कि लोकसभा, विधानसभा समेत किसी भी चुनाव में टिकट महज उन्हीं लोगों को दिया जाएगा जो तीन साल से संगठन से विधिवत जुड़े हों.

राहुल के फरमान के बाद बीजेपी समेत तमाम पार्टियों को छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले नेताओं का इस बात को डर सता रहा है कि कहीं ऐसा न हो इस फार्मूले के तहत उनका विधानसभा चुनाव में टिकट कट जाए.

शायद पूर्व विधायक भीमलाल आर्य को भी इस बात का अहसास हो गया है कि विधानसभा चुनाव में उनका पत्ता साफ हो सकता है, तभी वह तमाम शर्तों के साथ यह शर्त भी लगा रहे हैं कि सीएम रावत उनसे वार्ता करने के साथ ही उनकी मुलाकात पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी करवाएं.
ताकि वह अपने मन की बात उनसे कह सकें. दूसरी ओर पार्टी प्रदेशाध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से जो भी आदेश जारी किए गए हैं, उनका पालन सुनिश्चित कराया जाएगा. फिर भी वह पार्टी के  उपाध्यक्ष हैं यदि वे चाहें तो इसमें शिथिलता दे सकते हैं.
केंद्रीय नेताओं को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं ऐसा न हो यह मामला और अधिक राजनीतिक तूल पकड़े और विपक्षी बीजेपी इसका फायदा उठा ले. वहीं केंद्रीय आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद सीएम रावत ने देर शाम प्रदेश अध्यक्ष को वार्ता के लिए बुलाया. समाचार लिखे जाने तक वार्ता जारी थी.
पूर्व विधायक भीमलाल आर्य से यह पूछे जाने पर, कि क्या वह बीजेपी में लौटने की सोच रहे हैं? इस पर उन्होंने कहा कि बीजेपी में दोबारा जाने का सवाल ही नहीं उठता है.
जिस पार्टी ने उनका सदन के बाहर और भीतर दोनों जगह साथ न दिया हो, भला ऐसी पार्टी से दोबारा कैसे रिश्ता जोड़ा जा सकता है. दावे के साथ कहा कि बीजेपी में जाने के बारे में वह सोच भी नहीं सकते हैं.