उत्तराखंड में ‘यहां’ आज भी चलता है अंग्रेजों के जमाने का कानून, 70 साल बाद भी नहीं मिली आजादी

अंग्रेजों से भारत को तो आजादी मिले आज 70 साल हो चुके हैं. लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश सेना ने देहरादून सैन्य छावनी के इर्दगिर्द की निजी भूमि पर भवन निर्माण में जो प्रतिबंध लगाए थे, उससे यहां की जनता को आज तक आजादी नहीं मिली.

अस्थायी राजधानी के बीचों बीच बेशकीमती जमीन होने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं कर सकते. क्लेमेंटटाउन कैंट से गढ़ी कैंट के प्रेमनगर क्षेत्र के बीच पांच सौ एकड़ में फैली निजी भूमि 1942 में तत्कालीन पूर्व सैन्य कमान के जीओसी इन सी (जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ) के आदेश पर आज भी प्रतिबंधित है.

जिसने वहां आदेशों का उल्लंघन कर भवन बना लिया वह छावनी परिषदों के अनुसार अवैध हैं. उसे पानी, सड़क, नाली तक की सहूलियत को तरसना पड़ रहा है. आजादी के 69 साल बाद भी यहां रह रहे सैकड़ों परिवारों की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है.

कई बार सेना से यह परिवार प्रतिबंध हटाने की दुहाई दे चुके हैं, लेकिन सेना सुरक्षा का हवाला देकर प्रतिबंध हटाने को तैयार नहीं है. निजी भूमि पर निर्माण प्रतिबंध को हटाने की मांग को कई बार उठाया गया, लेकिन जीओसी इन सी मध्य कमान ने उसे खारिज कर दिया. सेना ने साल 2010 में प्रतिबंध को सुरक्षा कारणों से जारी 1942 के आदेश को यथावत रखने का पत्र जारी किया है.

आजादी के बाद 1947 में भारत पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान कुछ लोग लाहौर व पाकिस्तान से छोड़कर जब दून पहुंचे तो उनको युद्धबंदियों की बैरकों में अस्थाई तौर पर ठिकाना दिया गया. 1951 के बाद यह लोग जहां रह रहे थे उस जमीन व बैरक को बेहद कम कीमतों पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन कुछ लोगों की रजिस्ट्री करने के बाद सरकार ने रजिस्ट्री बंद कर दी.

छावनी परिषद गढ़ी कैंट बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष ओम प्रकाश गुप्प्ता ने बताया कि प्रेमनगर क्षेत्र में सात विंग, एक जनरल व एक स्पेशल विंग बनाए गए थे. इनमें विदेशी कैदियों को रखा जाता था. उसी समय से इन विंगों के आसपास निर्माण पर प्रतिबंध लगाया गया. ताकि आसपास के लोगों को किसी तरह की कोई बीमारी व अन्य परेशानी न हो. गुप्ता ने बताया कि देश आजाद हो गया लेकिन, आजतक इन नियमों को नहीं हटाया गया.

प्रतिबंधित क्षेत्र में 300 एकड़ भूमि गढ़ी कैंट के प्रेमनगर क्षेत्र की है. इसमें केरी गांव, रागनवाला, मोहनपुर, स्मिथनगर का क्षेत्र शामिल हैं. दूसरे कैंट क्लेमेंटटाउन के छोटा भारूवाला, ओसले लाइन, लालढांग, मोथोरोवाला, दौड़वाला, डकोटा और इंद्रापुरी फार्म का कुछ हिस्सा शामिल है. यहां अधिकांश भूमि मालिकों के मकान अवैध हैं.