नेपाल अगले महीने भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मेजबानी को उत्सुक

काठमांडू।… नेपाल सितंबर में भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मेजबानी के लिए उत्सुक है और देश में नया संविधान लागू किए जाने की पहली वषर्गांठ पर आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उनकी यात्रा के इंतजाम के लिए प्रयास जारी हैं.

नेपाली दैनिक ‘हिमालयन टाइम्स’ ने शीर्ष अधिकारियों और कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नेपाली पक्ष देश में नया संविधान लागू किए जाने की पहली वषर्गांठ पर आयोजित एक समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में भारत के राष्ट्राध्यक्ष की मेजबानी चाहता है. वषर्गांठ 19 सितंबर को है.

दैनिक ने कहा, ‘नेपाली और भारतीय अधिकारी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित यात्रा से पहले सितंबर में भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की नेपाल की राजकीय यात्रा तय करने का प्रयास कर रहे हैं.’ कयास लगाए जा रहे हैं कि जिनपिंग मध्य अक्टूबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने गोवा जाते समय संक्षिप्त प्रवास के तहत नेपाल में रुक सकते हैं.

दैनिक के अनुसार प्रणब दा की यात्रा से भारतीय पक्ष एक साफ संदेश देना चाहता है कि एक साल तक द्विपक्षीय रिश्तों में थोड़ा उतार-चढ़ाव के बावजूद वह नेपाल के साथ काम कर रहा है. बहरहाल, काठमांडू में अधिकारियों ने मुखर्जी की नेपाल यात्रा के संबंध में अभी कोई पुष्टि नहीं की है.

उधर, नई दिल्ली में भी अधिकारियों ने अभी तक यही कहा है कि राष्ट्रपति के लिए ऐसी कोई यात्रा तय नहीं है. उम्मीद की जा रही है कि मध्य सितंबर में मुखर्जी कुछ यूरोपीय देशों की यात्रा करेंगे. ‘हिमालयन टाइम्स’ ने यह भी दावा किया है कि नेपाल के संविधान के कुछ प्रावधानों पर भारत को ‘आपत्ति’ है और इसलिए संविधान लागू किए जाने की पहली वषर्गांठ में मुखर्जी की शिरकत में भारतीय पक्ष को संभवत: रुचि नहीं हो सकती है.

एक अधिकारी के हवाले से नेपाली दैनिक ने कहा, ‘अगर वषर्गांठ से पहले संविधान में संशोधन होता है तो संविधान लागू किए जाने की वषर्गांठ के इर्दगिर्द यात्रा की कोई तिथि तय की जा सकती है.’ नेपाल सरकार ने प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के विशेष दूत के रूप में उप-प्रधानमंत्री बिमलेन्द्र निधि और उप-प्रधानमंत्री कृष्ण बहादुर महार को क्रमश: भारत और चीन भेजने का शुक्रवार को ही फैसला किया.

निधि ने पत्रकारों को बताया कि उनकी भारत यात्रा का उद्देश्य नेपाल की यात्रा के लिए मुखर्जी को आमंत्रित करना और प्रचंड की भारत यात्रा की जमीन तैयार करना है. जिस दिन प्रचंड को शीर्ष पद के लिए चुना गया था, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें निमंत्रण दिया था.