देवीधुरा में मां बाराही के मंदिर में आषाड़ी कौतिक आज से, रक्षाबंधन के दिन विश्व प्रसिद्ध बग्वाल

सांकेतिक तस्वीर

विश्व प्रसिद्ध मां बाराही के मंदिर देवीधुरा में आषाड़ी कौतिक का आगाज 14 अगस्त से हो गया है. प्राचीन काल से आस्था और यहां की धार्मिक व सास्कृतिक धरोहर का प्रतीक रहे इस मेले में लाखों की संख्या में लोग मां बाराही के दर्शन को आएंगे.

राजनीतिक लोगों की भी मां बाराही में अटूट आस्था है और विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द कुंजवाल मां का आशीर्वाद लेने के साथ ही दस दिन तक चलने वाले इस बग्वाल मेले का उद्घाटन करेंगे.

राखी से ठीक 4 दिन पहले शुरू होने वाले देवीधुरा आषाड़ी कौतिक को लेकर जहां स्थानीय लोगों के साथ देश प्रदेश में बसे सभी लोगों को इंतजार रहता है, वहीं मान्यता है कि भगवान बाराह के दरबार में पहले नर बली हुआ करती थी. लेकिन चम्याल खाम की एक की महिला की इकौलौती संतान की जब नर बली की बारी आयी तो महिला ने मां की आराधना की.

आराधना से प्रसन्न होकर मां बाराही देवी ने महिला की संतान को जीवन का आशीर्वाद दिया. जिसके बाद देवीधुरा में नर बलि बंद हो गई और ऐतिहासिक बग्वाल युद्ध शुरुआत हुई.

bagwal-in-lohaghat

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बीते तीन साल से बग्वाल में पत्थर के बजाय फल-फूल से बग्वाल खेली जा रही है. भक्तों की अपार आस्था के चलते जहां हर साल यहां लाखों श्रद्धालु आते है. वहीं राखी के दिन होने वाले बग्वाल युद्ध इसका प्रमुख आकर्षण का केंद्र है.

इस बग्वाल में चार खाम चम्याल, वालिक, गहरवाल और लमगड़िया के रणबांकुरों के बीच जहां मां को प्रसन्न करने के लिए युद्ध होगा. दस दिन तक चलने वाले इस मेले का आयोजन जिला पंचायत चम्पावत द्वारा किया जाता है. वही बग्वाल मेले का शुभारम्भ विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल करेंगे.

प्राचीन काल से चली आ रही बग्वाल की परम्परा जहां आज भी जारी है.. वही मां बाराही के दर्शन के लिए उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालु, बग्वाल देखने को भी देश-विदेश से देवीधुरा पहुंचते हैं.