वास्तु ज्ञान : क्या घर का बायां हिस्सा भारी होना उचित नहीं है?

जब आप अपने लिए एक अदद आशियाने का निर्माण करते हैं, तो आपके मन में उसे लेकर ढेरों सवाल होते हैं क्योंकि आपके घर का वातावरण और उसकी बनावट से ही आपके जीवन में खुशियां संचालित होती हैं. मन में उठने वाले सवालों में से एक अहम सवाल यह भी है कि कहीं हमारे घर कर बायां हिस्सा भारी तो नहीं है?

इसका कारण यह है कि आम तौर पर लोगों के मन में ऐसी धारणा है कि अगर घर का बायां हिस्सा भारी होगा तो वो घर में रहने वाले लोगों के लिए अच्छा नहीं होगा वहां रहने वाले लोग अनचाही समस्याओं से परेशान होते रहेंगे. ऐसा घर परिवार के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए ठीक नहीं होगा.

अकसर ऐसा माना जाता है कि पूर्व फेसिंग प्लॉट सर्वथा शुभ होते हैं और यह मिथ्या भी उसी कारण चल पड़ी. उत्तर दिशा हमेशा पूर्व के बाई तरफ आती है और वास्तु अनुसार उत्तर दिशा का भारी होना सही नहीं माना जाता. परंतु इस कथन से यह बात कहना कि घर का बायां हिस्सा भारी होना ठीक नहीं है तो यह सर्वथा उचित नहीं है, क्योंकि वास्तु दिशाओं के आधार पर देखा जाता है. और यही कथन यदि पश्चिम मुखी घर के लिए कहेंगे तो इसका अर्थ इससे भिन्न हो जाऐेगा. क्योंकि पश्चिम का बायां हिस्सा दक्षिण होता है जिसका भारी होना उचित माना गया है. इसलिए दाएं या बाएं को छोड़कर हमेशा दिशा के आधार पर बात करनी चाहिए.

क्या है घर का कोई हिस्सा हल्का और भारी होना
घर का कोई भाग हल्का या भारी होने का अर्थ वहां रखे सामान की मात्रा और उसके भार से नहीं है. घर का कोई हिस्सा भारी होने का अर्थ यह है कि उसके निर्माण का अनुपात क्या है. मसलन उसमें कितना हिस्सा खुला है और कितना हिस्सा बंद है. दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि हम उपलब्ध जमीन में से कुछ हिस्से को छोड़ना चाहते है तो यह उत्तर की तरफ अधिक हो परंतु इसमें भी घर की मुख्यदिशा और मुखिया की जन्मतिथि के अनुसार कुछ चीजें बदल जाती हैं.

छोटे परंतु महत्वपूर्ण उपाय
घर का निर्माण करते समय इस बात का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए कि अगर उत्तर-पूर्व की दीवार नौ इंच मोटी है, तो फिर दक्षिण-पश्चिम की मोटाई तेरह इंच होनी चाहिए.

– घर का निर्माण करते समय इस बात का इस बात का खास तौर पर ध्यान रखें कि अगर कोई ऊंची चीज बना रहे हैं, तो वह दक्षिण दिशा में हो. इसका कारण यह है कि पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की शुरुआत नॉर्थ पोल से साउथ पोल तक जाता है.

– सोते समय आपका सिर हमेशा दक्षिण की ओर हो. इसका खास कारण पृथ्वी के 2 पोल है, उत्तरी पोल का सिर तथा दक्षिणी पोल को पैर माना गया है. जब तक मनुष्य जीवित अवस्था में है उसे हमेशा विपिरीत अवस्था में सोना चाहिए. ऐसा करने से न केवल अच्छी नींद आती हैं बल्कि व्यक्ति कुछ हद तक तनाव से भी मुक्त रहता है.

उत्तर-पूर्व के भारीपन को दूर करने के उपाय
अगर आपके घर का निर्माण करते समय आपके घर का उत्तर-पूर्व हिस्सा दक्षिण के मुकाबले ज्यादा भारी हो गया है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. बिना कोई तोड़-फोड़ किए वास्तु के आसान समाधानों के माध्यम से आप अपने घर के इस दोष को असानी से दूर कर सकते हैं.

– अगर आपके घर का उत्तर-पूर्व हिस्सा भारी है, तो अपने घर के दक्षिण हिस्से में उंचा चबूतरा या खंभा बनाकर आप उसे संतुलित कर सकते हैं.
– घर के दक्षिण में पूर्वजों की या फिर पहाड़ की तस्वीर लगाएं. ये वर्चुअल चीजें हैं, जिनका मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है, जिसकी वजह से आपके जीवन से नकरात्मकता दूर होती है और आपके जीवन में खुशहाली का समावेश होता है.
– वास्तु विशेषज्ञ की सलाह से दक्षिण दिशा में पत्थर के पिरामिड लगवाएं. बाजार में मिलने वाले प्लास्टिक के पिरामिड का इस्तेमाल ना करें.
– भारी-भरकम फर्नीचर को घर के अंदर उत्तर-पूर्व दिशा में रखने की बजाय दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही रखें.
– पूर्व दिशा में सामान रखते समय इस बात का ध्यान रखें कि दीवार और सामान के बीच में थोड़ा सा गैप हो.

यह लेख मशहूर ज्योतिष, वास्तु और फेंग्शुई विशेषज्ञ नरेश सिंगल से बातचीत के आधार पर लिखा गया है. वास्तु से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए नरेश सिंगल से संपर्क करें…

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