हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में संजीवनी की खोज करेंगे सरकारी ‘हनुमान’

उत्तराखंड सरकार का स्वास्थ्य महकमा एक बार फिर संजीवनी बूटी की खोज को लेकर जमकर सुर्खियां बटोर रहा है. स्वास्थ्य महकमे ने संजीवनी बूटी की खोज के लिए एक कमेटी का गठन किया है. अब यह कमेटी ‘हनुमान’ की भूमिका निभाते हुए संजीवनी ढूंढेगी. देखना यह है कि यह संजीवनी हरीश रावत सरकार के कितने काम आती है, जो अगले साल चुनावी मैदान में उतरेगी.

स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा में संजीवनी की खोज को लेकर एक अहम बैठक की, जिसमें आयुर्वेद विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे. स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों के साथ संजीवनी की खोज को लेकर कई मसलों पर चर्चा की. खासतौर से हिमालय पर्वत के दुर्गम क्षेत्रों में संजीवनी के मसले पर चर्चा हुई.

दरअसल आयुर्वेद विभाग अब संजीवनी की खोज के लिए गंभीरता से काम कर रहा है. स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी का कहना है कि संजीवनी के बारे में पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है साथ रामायण और दूसरे ग्रंथों के लेखों की मदद ली जा रही है.

उनका कहना है कि अब तक संजीवनी की खोज के लिए कई लेखकों ने अपनी किताबें भी लिखी है. उनका कहना है कि संजीवनी की खोज आयुर्वेद विभाग के लिए एक ऐतिहासिक खोज सिद्ध होगी. क्योंकि आने वाले सालों में आयुर्वेद चिकित्सा का ग्राफ बढ़ेगा और इंसान आयुर्वेदिक चिकित्सा की तरफ फिर लौट रहा है. इस नजारिए से संजीवनी की खोज आयुर्वेद विभाग के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकती है.

संजीवनी आम लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है. क्योंकि जिस तरह से शास्त्रों में संजीवनी को लेकर कई महत्वपूर्व लेखों का वर्णन किया गया है, इससे साफ है संजीवनी समाज के लिए काफी अहम होगी. फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि सितम्बर से संजीवनी की खोज के लिए कमेटी के सदस्य पर्वतीय क्षेत्रों में भ्रमण करेंगे और संजीवनी की तलाश करेंगे.