विश्व विरासत फूलों की घाटी में पर्यटकों के जाने पर रोक, ‘जानें क्या है वजह’

विश्व विरासत फूलों की घाटी में पर्यटकों के जाने पर रोक लगा दी गई है. घांघरिया से आगे द्वारी पुल के पास पैदल ट्रैक का 300 मीटर हिस्सा भूस्खलन के कारण पूरी तरह ध्वस्त हो गया है. इस दौरान घाटी में देशी विदेशी पर्यटकों बडी संख्या में पहुंच रहे थे.

गुरुवार को 86 पर्यटक फूलों की घाटी में मार्ग अवरुद् होने के कारण फंस गये थे. फूलों की घाटी में तैनात वन कर्मियों ने वायरलेस से घांघरिया और जोशीमठ में उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद वन विभाग और एसडीआरएफ के जवानों ने पर्यटकों को फूलों की घाटी से रेस्क्यू किया.

आपको बताते चले कि फूलों की घाटी का पैदल ट्रैक 2013 की जलप्रलय में पूरी तरह ध्वस्त हो गया था. वन विभाग ने वर्ष 2014 में घांघरिया से आगे द्वारी पुल से फूलों की घाटी जाने के लिए नया ट्रैक विकसित किया है.

द्वारी पुल के पास ही भूस्खलन के कारण करीब 300 मीटर का हिस्सा पुष्पावती नदी में बह गया. फूलों की घाटी के रेंज अधिकारी दीपक रावत ने बताया कि पैदल मार्ग को ठीक करने में दो से तीन का समय लग सकता है. तब तक पर्यटकों के जाने पर रोक लगा दी गई है.

फूलों की घाटी की सैर का ये सबसे उपयुक्त समय है. 521 फूलों की प्रजातियां विश्व प्रसिद्व फूलों की घाटी में पाई जाती है. लगभग 10 वर्ग किलोमीटर में फैली इस घाटी के दीदार के लिए इस वर्ष देश विदेश के सैकडों सैलानी पहुचे.