चीन ने भारतीय क्षेत्र में कोई सड़क नहीं बनायी है : पर्रिकर

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आज स्पष्ट किया कि चीन ने भारतीय क्षेत्र में किसी सड़क का निर्माण नहीं किया है.

लोकसभा में प्रश्नकाल में सदस्यों के सवालों के जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले दो सालों में उनके ध्यान में ऐसी कोई बात नहीं आयी है जिससे यह पता चले कि चीन ने ‘हमारे क्षेत्र’ में किसी सड़क का निर्माण किया है.

उन्होंने इसके साथ ही कांग्रेस सदस्य गौरव गोगोई के भारत चीन सीमा के आसपास बसे गांवों में बेहतर डिजिटल ब्रॉडबैंड सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस क्षेत्र में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के सुझाव को स्वागत योज्ञ बताया और साथ ही इस पर विचार करने का आश्वासन भी दिया.

भारत चीन सीमा पर सड़कों के निर्माण के संबंध में किए गए मूल सवाल के जवाब में रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) इस जिम्मेदारी को निभाता रहा है और पिछले साल तक यह सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के तहत कार्यरत था. उन्होंने बताया कि पिछले साल ही इस विभाग को रक्षा मंत्रालय के अधीन लाया गया है.

उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में सड़कों के निर्माण में बजट की कोई बाधा नहीं है तथा यदि जरूरत पड़ी तो मंत्रालय अनुपूरक बजट ला सकता है.

उन्होंने बताया कि 2015. 2020 की दीर्घावधि कार्य योजना के तहत देश के सीमावर्ती इलाकों में 22,225. 17 किलोमीटर लंबे 519 नए मार्गो का निर्माण किया जाना है. उन्होंने साथ ही बताया कि भारत चीन सीमा पर 73 मागारें की पहचान सामरिक मागो’ के रूप में की गयी है जिनमें से 3417 किलोमीटर लंबे 61 मार्गो के निर्माण की जिम्मेदारी बीआरओ को दी गयी थी जिन्हें वर्ष 2012 तक पूरा किये जाने की योजना थी. इसमें से 707. 24 किलोमीटर लंबे 22 मागो’ का निर्माण पूरा कर लिया है.

पर्रिकर ने बताया कि 39 अन्य मागो’ का निर्माण कार्य पूरा करने की योजना को संशोधित किया गया है. इसके अनुसार पांच मागो’ को इस साल , आठ मागो’ को 2017 में , 12 को 2018 में , आठ को 2019 में और बाकी छह को 2020 में पूरा किया जाएगा.