ये पड़ोसी है कि मानता नहीं : राजनाथ

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत हमेशा ही अपने पाकिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों की कोशिश करता रहा है, लेकिन ये पड़ोसी है कि मानता नहीं. राजनाथ ने कहा, ‘हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं. हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध पाकिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण रहे हैं. हमने उनके साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश की है.’

उन्होंने इस्लामाबाद में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के सदस्य देशों के गृहमंत्रियों की बैठक से लौटने के बाद राज्यसभा को संबोधित करते हुए यह बयान दिया. इसके बाद उन्होंने लोकसभा में भी यही बयान दिया.

विपक्षी सांसद भी सरकार के साथ लामबंद दिखे और पाकिस्तान में राजनाथ सिंह के साथ खस्ता व्यवहार की आलोचना की.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पाकिस्तान का व्यवहार निराशाजनक रहा.

जनता दल युनाइटेड (जदयू) नेता शरद यादव ने पाकिस्तान की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया और हमारे गृहमंत्री के साथ बुरा बर्ताव किया.

राजनाथ ने कहा कि वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे कि पाकिस्तान ने उनके साथ कैसा बर्ताव किया लेकिन उन्होंने वही किया जिससे अपने देश की गरिमा बरकरार रह सके.

राजनाथ ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के गृहमंत्री निसार अली खान द्वारा आयोजित दोपहर भोज में भी हिस्सा नहीं लिया.

राजनाथ ने राज्यसभा को बताया, ‘यह सच है कि पाकिस्तान के गृहमंत्री चौधरी निसार अली खान ने सभी को दोपहर भोज के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन इसके बाद वह अपनी कार में चले गए. मैं भी चला गया. मुझे कोई शिकायत नहीं है, क्योंकि मैं वहां भोज के लिए नहीं गया था लेकिन हमारी अपने अतिथियों का स्वागत करने की गरिमा है और हमें इसे बनाए रखना चाहिए.’

राजनाथ ने इस्लामाबाद में दक्षेस बैठक को संबोधित करते हुए पाकिस्तान सरकार पर आंतकवाद को समर्थन देने और पाकिस्तान समर्थक कश्मीरी विद्रोही बुरहान वानी को ‘शहीद’ कहने पर उसकी आलोचना की.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस्लामाबाद में राजनाथ सिंह के भाषण को ‘ब्लैक आउट’ (प्रसारण पर रोक) कर दिया गया और उनके साथ गए भारतीय पत्रकारों को बैठक में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई.

राजनाथ ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि उनके भाषण को जानबूझकर लाइव कवर करने से रोकने के लिए सेंसर किया गया.

उन्होंने कहा, ‘मैं पिछले ऐसे अवसरों के प्रोटोकॉल मानदंडों से अवगत नहीं हूं. इस पर विदेश मंत्रालय से बात करनी होगी कि भाषण को कवर किया गया या नहीं. यह पूर्वनियोजित था या ऐसा जानबूझकर किया गया. मैं इसके बारे में अभी कुछ नहीं कह सकता.’

राजनाथ ने कहा, ‘लेकिन यह सच है कि भारतीय पत्रकारों को बैठक में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई.’