नैनीताल : हाईकोर्ट में अर्जी, पूर्व मुख्यमंत्रियों से जल्द सरकारी आवास खाली कराए जाएं

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पद छोडने के बावजूद लखनऊ में सालों से सरकारी बंगलों पर काबिज उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को उन्हें खाली करने का आदेश सुनाया था. इस आदेश के बाद प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता अवधेश कौशल ने बुधवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक शपथपत्र दाखिल कर साल 2010 में दायर अपनी इसी प्रकार की एक याचिका पर जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया.

यहां एक गैर सरकारी संगठन रूलक के अध्यक्ष कौशल ने बताया, ‘मैंने आज अपने वकील के जरिए उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक शपथपत्र दाखिल किया है और राज्य के पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा अस्थायी राजधानी देहरादून, दिल्ली या लखनऊ में अपना घर होने के बावजूद यहां सरकारी बंगलों पर कब्जा बनाए रखने के संबंध में दायर याचिका पर जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया है.’

उन्होंने कहा, ‘यह राज्य के राजकोष पर बोझ है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पद छोड़ने के सालों बाद भी मुफ्त में सरकारी बंगलों पर काबिज हैं.’ कौशल ने कहा कि जब राज्य मानवाधिकार आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं के कार्यालय किराए के भवनों में चल रहे हों, तो ऐसे समय में यह बात स्वीकार करना बहुत मुश्किल है. उन्होंने बताया कि मानवाधिकार आयोग को अपने कार्यालय भवन का 1.20 लाख रुपये प्रतिमाह किराया देना पड़ रहा है.

कौशल द्वारा दायर याचिका में पूर्व मुख्यमंत्रियों नारायण दत्त तिवारी, भुवन चंद्र खंडूरी, भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा के नाम आए हैं.

तिवारी और बहुगुणा का हवाला देते हुए कौशल ने कहा कि दोनों के ही अलग-अलग शहरों में अपने बड़े-बड़े घर हैं. उन्होंने कहा, ‘साल 2012 विधानसभा चुनावों में चुनाव अधिकारी को जमा कराए गए हलफनामे के अनुसार, जहां तिवारी का देहरादून, लखनऊ और दिल्ली में अपना घर है. वहीं बहुगुणा के दिल्ली में छह फ्लैट हैं.’