वेंकैया ने की दलितों के खिलाफ हिंसा की निंदा, कहा, धर्मांतरण नहीं समाधान

केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने गौरक्षा के नाम पर दलितों पर हुई हिंसा की मंगलवार को निंदा की, लेकिन साथ ही कहा कि धर्मांतरण करने से पूर्वाग्रहों का अंत नहीं होगा.

कुछ दिन पहले उनके मंत्रिमंडल सहयोगी रामदास अठावले ने कहा था कि समुदाय के लोगों को दबाव या अपने साथ होने वाली हिंसा से बचने के लिए बौद्ध धर्म अपना लेना चाहिए. नायडू ने कहा कि हिन्दू धर्म भेदभाव की मंजूरी नहीं देता.

उन्होंने कहा, ‘कोई भी व्यक्ति जो दूसरे इंसान के साथ भेदभाव करता है, उसे कभी भी हिन्दू कहा जा सकता.’ नायडू ने आईएएस टॉपर टीना डाबी को सम्मानित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से कहा, ‘अगर आप गाय का सम्मान करते हैं तो यह अच्छा है, लेकिन दूसरे इंसानों को भी जीने का अधिकार है, अपना काम करने का अधिकार है.’

अगर आप गाय का सम्मान करना चाहते हैं तो करें. इसमें कुछ गलत नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसके नाम पर किसी की हत्या कर दें. यह पूरी तरह गलत है.’ टीना डाबी एक दलित हैं.

गुजरात और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में गौ रक्षकों द्वारा दलितों पर हिंसा की घटनाओं को लेकर बीजेपी आलोचनाओं के घेरे में है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने सुझाया कि धर्मांतरण से इस समस्या का अंत हो सकता है लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऐसे मामले हैं जहां लोग ने बताया कि दूसरे धर्मों में भी उन्होंने ऐसी ही स्थिति का सामना किया.

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘अब वे शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें आरक्षण नहीं मिल रहा, क्योंकि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं देता.’ ऐसी खबरें हैं कि पिछले हफ्ते तमिलनाडु के करूर क्षेत्र में एक मंदिर उत्सव में हिस्सा लेने से रोकने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ दलित परिवारों ने इस्लाम धर्म अपनाने की धमकी दी.

नायडू ने समानता पर जोर देते हुए कहा, ‘भारत माता की जय का मतलब देश में रहने वाले सभी लोगों का गौरव है’ और देश में रहने वाले लोग भारतीय हैं एवं हर पहलू से बराबर हैं.