160 साल के इतिहास में खो जाने को मजबूर करती है ‘मसूरी देन एंड नाउ’ किताब

न्यूजीलैंड के लेखक मार्क विंडसर की किताब ‘लंडौर एंड मसूरी देन एंड नाउ’ में मसूरी के एक सौ से अधिक भवनों, लैंड मार्क की पुरानी फोटो की तुलना वर्तमान फोटो के साथ की है.

कैंपटी फॉल, मालरोड, मसूरी में सबसे पहले बने मलिंगगार भवन की स्थिति तब और अब कैसे हैं, सब अपनी पुस्तक में फोटो के साथ लिखा है.

mussoorie-then-now1मार्क विंडसर का कहना है कि उन्होंने मसूरी में दो साल में जगह-जगह भ्रमण कर फोटो का संकलन किया है. मार्क विंडसर ने कहा कि मसूरी सहित लंदन की सबसे पुरानी ब्रिटिश लाइब्रेरी से मसूरी और देहरादून के पुराने फोटो और मानचित्र इकट्ठा किए हैं.

हैरिटेज सेंटर मसूरी की संचालिका सुरभि अग्रवाल का कहा कि पहाड़ों की रानी मसूरी के 160 साल पुराने भवन, पर्यटक स्थलों, धार्मिक स्थानों की फोटो को भी मार्क विंडसर ने अपनी पुस्तक में स्थान दिया है. सुरभि अग्रवाल ने कहा कि मार्क की किताब में लोगों को मसूरी के इतिहास से संबधित कई नई जानकारियां मिलेंगी.

पर्यटन व्यवसाय से जुड़े सतीश चन्द्र ढोंढियाल ने कहा कि मार्क की किताब में ऐसी कई बातों का उल्लेख किया गया है, जिनके बारे में आज तक लोगों को जानकारी ही नहीं है. शहर में आने वाले पर्यटकों के लिए भी मार्क की किताब बेहद उपयोगी हो सकती है. पर्यटकों को मसूरी के 160 साल के इतिहास के साथ ही मसूरी तब कैसी थी और अब कैसी है के बारे में जानकारी मिलेगी.

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