उत्तराखंड सरकार के ये ‘हनुमान’ खोज लाएंगे संजीवनी बूटी, बहस जारी

उत्तराखंड सरकार ने संजीवनी बूटी को खोजने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है. लेकिन कमेटी के आगे भी हिमालय में मौजूद इस रहस्यमयी और चमत्कारी जड़ी बूटी को कहां और कैसे खोजा जाएगा यह सबसे बड़ा सवाल है.

संजीवनी बूटी पर राज्य सरकार की सक्रियता के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर बहस शुरू हो चुकी है. रामायण काल में जब भगवान राम और रावण के बीच युद् चल रहा था तो मेघनाथ के भयंकर अस्त्र प्रयोग के कारण लक्ष्मण मूर्क्षित हो गए.

वैद्यराज सुषेण के कहने पर जामवंत ने हनुमान को हिमालय से संजीवनी बूटी लाने को कहा. हनुमान संजीवनी की तलाश में जब हिमालय आए और संजीवनी बूटी की तलाश करने लगे, असंख्य जुड़ी बूटियों को देखकर पवनसुत हनुमान भ्रमित हो गए.

द्रोणागिरि पर्वत पर पहुंचकर उन्होंने संजीवनी बूटी खोजनी शुरू की, लेकिन वो चमत्कारिक जड़ी-बूटी कहां है वे पहचान नहीं पाए. हनुमान ने द्रोणागिरि गांव में मौजूद एक वृद्ध महिला से संजीवनी बूटी के बारे में पूछा तो बुजुर्ग महिला ने द्रोणागिरि पर्वत की ओर इशारा करते हुए हनुमान को संजीवनी का पता बताया, फिर हनुमान द्रोणागिरि पर्वत का एक टुकडा उठाकर अपने साथ ले गए.

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तभी से द्रोणागिरि के लोग हनुमान से नाराज है और आज भी इस गांव में हनुमान की पूजा-अर्चना प्रतिबंधित है. ग्रामीण मानते हैं कि हनुमान ने ही उनके अराध्य पर्वत द्रोणागिरि को खंडित किया. इसके बाद द्रोणागिरि में आज भी महिलाएं द्रोणागिरि पर्वत की पूजा नहीं करती. यहां सालों से संजीवनी बूटी की तलाश की जा रही है.

द्रोणागिरि के लोगों का मानना है कि आज भी संजीवनी बूटी इस क्षेत्र में स्थित है. समुद्रतल से 14 हजार फीट की ऊचाई पर स्थित द्रोणागिरि गांव चमोली जिले की नीति घाटी में स्थित है.

राज्य सरकार ने इसकी खोज के लिए कमेटी का गठन तो कर दिया, लेकिन संजीवनी बूटी की खोज कब तक हो पाएगी ये खुद सरकार भी नहीं बता सकती. दुनियाभर में संजीवनी बूटी पर शोध और बहस जारी है. कई वैज्ञानिकों का मानना है कि संजीवनी कई जड़ी बूटियों का संग्रह है, तो कई इसे मात्र एक ही जड़ी बूटी मानते है.

रामायण में जिस चमत्कारिक जड़ी-बूटी का वर्णन किया गया है वो बूटी रात के समय चकमती है. यह सच है कि हिमालय में आज भी कई बहुमुल्य जड़ी बूटियां मौजूद है, जिनपर आज तक शोध नहीं हो पाया है तो क्या संजीवनी बूटी भी उसी में शामिल है.