‘सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों से पलायन के कारण ही घुसपैठ का बड़ा कारण’

उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों से बड़े पैमाने पर हो रहे पलायन को चीनी घुसपैठ के खतरे का एक बड़ा कारण बताते हुए वरिष्ठ बीजेपी नेता तरुण विजय ने इन क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे और स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता जताई है.

पूर्व सांसद तरुण विजय ने एक बयान में कहा, ‘जनविहीन और सुनसान पड़े सीमावर्ती गांव शत्रु को घुसपैठ का खुला न्यौता हैं. सीमावर्ती क्षेत्रों खासतौर से हिमालयी क्षेत्रों में जल्द आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है, क्योंकि वहां की जनसंख्या बेहतर करियर और जीवन स्तर की तवाश में अपने घर-बार को तेजी से त्याग रही है.

चमोली में बाड़ाहोती, पिथौरागढ में गुंजी और मिलम ग्लेशियर को पलायन का सर्वाधिक दंश झेलने वाले क्षेत्र बताते हुए पूर्व राज्यसभा सांसद ने कहा कि मुनस्यारी से मिलम ग्लेशियर तक के 105 किलोमीटर के पैदल सफर में उन्हें पूरा क्षेत्र सुनसान और मानवीय गतिविधियों से अछूता मिला.

उन्होंने कहा कि पूरा क्षेत्र सुनसान और बियावान दिखता है और दुनिया के लिए कस्तूरी मृग और भोजपत्र के जंगलों के लिए विख्यात इस क्षेत्र में केवल कुछ ही परिवार यहां बचे हैं. इसी कारण यहां तस्करों की मौज है. बीजेपी नेता ने कहा कि चीन ने मिलम तक एक पक्की सड़क बना ली है, जबकि भारतीय सैनिकों को वहां अपनी चौकी तक पहुंचने के लिए अपने हथियारों और सामान के साथ तीन किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है.