चमोली : चीनी हैलीकॉप्टर ने भी की घुसपैठ, एक हफ्ते में तीन बार चीन ने लांघी सीमा

अरुणाचल और लद्दाख में चीनी घुसपैठ की खबरें भले ही मीडिया में सुर्खियां बनती रही हों, सुर्खियों से परे उत्तराखंड से लगी सीमा पर भी चीनी सैनिकों की घुसपैठ लगातार जारी है। स्थानीय सूत्रों की मानें तो पिछले सात दिन में ही चीनी सैनिकों ने तीन बार भारतीय सीमा में घुसपैठ की है।

लैंड रिकॉर्ड चैक करने गए प्रशासनिक दल को वापस लौटाने के बाद 25 जुलाई को बाड़ाहोती में चीन का हेलीकॉप्टर भारतीय एयरस्पेस में देखा गया। हेलीकॉप्टर में सवार चीनी सैनिक बाड़ाहोती क्षेत्र की वीडियोग्राफी करते देखे गए। दरअसल 1962 भारत-चीन युद्ध के बाद से चीन इस क्षेत्र को विवादित बताता रहा है।

उत्तराखंड में भारत की चीन से 350 किलोमीटर लंबी सीमा लगी हुई है। आमतौर पर यहां शांति का माहौल रहा है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि यहां सब कुछ ठीक-ठाक है। चमोली के स्थानीय लोगों और यहां तैनात अर्द्धसैनिक बलों के लिए यहां चीनी सैनिकों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। पिछले एक हफ्ते में ही बाड़ाहोती में तीन बार चीनी सैनिकों ने सीमा का उल्लंघन किया है।

चमोली जिला प्रशासन की टीम को बाड़ाहोती में दिखे चीनी सैनिक
साल में 19 जुलाई को चमोली जिला प्रशासन की टीम बाड़ाहोती क्षेत्र में लैंड रिकॉर्ड के रूटीन निरीक्षण पर गई थी। एसडीएम योगेंद्र सिंह के नेतृत्व में चमोली जिला प्रशासन की 19 सदस्यीय टीम सुमना पोस्ट तक पहुंची। होतीगाड़ नदी का जलस्तर बढ़ने से जिला प्रशासन की टीम अपने वाहन वहीं छोड़, सेना के वाहन से रिमखिम चौकी पहुंची। वहां सीमा क्षेत्र में करीब आठ किमी की दूरी पर पहले से चीनी सैनिकों को मौजूद देख प्रशासन की राजस्व टीम चौंक गई।

राजस्व टीम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक चीनी सैनिक सीमा के अंदर कैंप कर रहे थे। जैसे ही चीनी सैनिकों ने भारतीय दल को देखा तो दूर से ही इशारा कर लौट जाने को कहा। इसके बाद चमोली प्रशासन की टीम वापस लौट गई, लेकिन टीम ने वहां तैनात आईटीबीपी के दल को पूरी जानकारी दी।

22 जुलाई को भारतीय जवानों से भी हुआ आमना-सामना
चमोली जिला प्रशासन की राजस्व टीम के लौटने के बाद 22 जुलाई को भारतीय जवानों के साथ चीनी सैनिकों का आमना-सामना हुआ। सूत्रों के अनुसार बाड़ाहोती के बुग्याल में करीब 38 मिनट तक एक-दूसरे के पीछे हटने और वहां से चले जाने को लेकर बहस हुई। 38 मिनट की बहस के बाद फिर दोनों पक्ष वहां से लौट गए। बहस के दौरान भारतीय जवान सादी वर्दी में थे और उनके पास हथियार भी नहीं थे।

सूत्रों के मुताबिक आईटीबीपी के डीजी ने गृह मंत्रालय को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके मुताबिक बाड़ाहोती में तुनजुन-ला पास तक चीनी सैनिक पहुंच गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सैनिक 200 मीटर अंदर तक घुस आए थे। इस रिपोर्ट के मुताबिक घुसपैठ की घटना 22 जुलाई को हुई बताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 जुलाई को ही चीनी सैनिक वापस लौट गए थे।

25 जुलाई को चीनी हेलीकॉप्टर भी भारतीय एयरस्पेस में देखे गए
चीन का चमोली जिले के बाड़ाहोती में लगातार सीमा का उल्लंघन जारी है। सूत्रों के मुताबिक 25 जुलाई को असैन्य जोन में चीनी सैनिकों का जमावड़ा देखा गया। इसी दिन चीनी सैनिकों ने एयरस्पेस का उल्लंघन भी किया। करीब दस मिनट तक चीन का हेलीकॉप्टर भारतीय एयरस्पेस में उड़ान भरता रहा। माना जा रहा है कि हेलीकॉप्टर से चीनी सैनिकों ने क्षेत्र की वीडियोग्राफी की है। हालांकि थोड़ी देर बाद ही हेलीकॉप्टर गायब हो गया। यह चीन का जाबो हेलीकॉप्टर था।

दरअसल चीन लगातार बाड़ाहोती इलाके में असैन्य क्षेत्र का उल्लंघन करता रहता है। अगर बाड़ाहोती इलाके के बुग्याल में भेड़-बकरियां चराने वाले चरवाहों की मानें तो पिछले दो सालों में चीनी सैनिकों की बाड़ाहोती में गतिविधियां बढ़ी हैं। एक चरवाहे ने प्रदेश18/ईटीवी संवाददाता को बताया कि पिछले साल यानी 2015 में ही हर महीने उन्होंने बड़ाहोती में चीनी सैनिकों की गतिविधियां देखीं।

पिछले साल 14-15 बार चीनी सैनिक बाड़ाहोती में दिखे
संवाददाता ने पूछा कि पिछले साल कुल कितनी बार उन्होने चीनी सैनिक देखे होंगे तो चरवाहे न कहा कि अकेले 2015 में ही उन्होंने 14-15 बार चीनी सैनिकों को बाड़ाहोती इलाके में देखा था। जबकि 2014 में चार बार ही उन्हें यहां चीनी सैनिक दिखाई दिए थे। लेकिन अब जिस तरह पिछले सात दिन में ही करीब तीन बार चीनी सैनिक भारत-चीन सीएम का उल्लंघन कर चुके हैं, यह बेहद चिंता की बात है।

चीन से लगे 350 किलोमीटर बॉर्डर पर आईटीबीपी की चौकसी रहती है। आईटीबीपी की शॉर्ट रेंज पेट्रोलिंग 15 दिन में और लॉन्ग रेंज पेट्रोलिंग (एलआरपी) एक महीने में होती है। पिथौरागढ़ में नाभी ढांग आईटीबीपी की अंतिम पोस्ट है। यहां का रास्ता बेहद मुश्किल भरा है।

भारत-चीन के बीच अंतरराष्ट्रीय तनाव भी एक वजह
देहरादून में वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा बाड़ाहोती में सीमा के उल्लंघन को पिछले कुछ समय में भारत-चीन के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े तनाव से जोड़कर भी देखते हैं। साथ ही बहुगुणा का कहना है कि भारत सरकार को चमोली और बाड़ाहोती में चौकसी के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं और उपकरण बढ़ाने की जरूरत है।

बहुगुणा का कहना है कि आज भी भारत-चीन सीमा की सुरक्षा पारंपरिक ढंग से की जा रही है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुधवार को बाड़ाहोती में चीनी सैनिकों की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए कहा था कि वे आज भी सीमा के पास जमे हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि उन्होंने वहां बहने वाली होतीगाड़ नदी को पार नहीं किया है।

चमोली के बाड़ाहोती में चीनी सैनिकों के घुसने का मामला गुरुवार को लोकसभा में भी गूंजा। उधर केंद्रीय गृहमंत्री राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने दिल्ली में बुधवार को कहा था कि राज्य सरकार की रिपोर्ट देखकर ही कहा जा सकता है कि चीन ने घुसपैठ की है या नहीं।

बाड़ाहोती को लेकर क्यों है विवाद
1958 में आईटीबीपी से पहले तिब्बत से लगी सीमा पर पीएसी की एक टुकड़ी (एसपीएफ) वहां तैनात रहती थी। उस दौरान एसपीएफ और चीन की पीएलए के बीच टकराव हुआ और उसके बाद काफी समय तक वहां चीनी सैनिक डेरा जमाए रहे। फिर दोनों पक्षों में एक-एक किलोमीटर पीछे हटने का समझौता हुआ। उसके बाद 1962 में भारत-चीन युद्ध हुआ। युद्ध के बाद से ही चीन इस क्षेत्र को विवादित क्षेत्र मानता रहा है।