ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग पर होंगी 105 किमी की 17 सुरंगें, खुशखबरी और भी हैं पढ़ें…

अगर आप भी ऋषिकेश से ट्रेन में सवार होकर कर्णप्रयाग तक सुंदर घाटियों और गुफाओं के बीच होकर सफर करने के रोमांच के सपने संजो रहे हैं तो बता दें कि इस सपने को पूरा होने में 8-10 साल लगेंगे। जी हां ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के निर्माण में आठ से 10 साल लगेंगे।

एक बार रेल ट्रैक का काम पूरा होने के बाद शुरुआत में इस पर चार ट्रेनें दौड़ेंगी। ये ट्रेक 16 से 18 ट्रेनों की क्षमता वाला होगा। रेल मंत्रालय के अफसरों ने रक्षा संबंधी स्थायी समिति व गढ़वाल सांसद पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी को यह जानकारी दी है। खंडूरी ने रेल प्रोजेक्ट मामले में रेल मंत्री सुरेश प्रभू से मुलाकात की थी, जिनके निर्देश पर मंत्रालय के अफसरों ने खंडूरी से उनके कार्यालय में मुलाकात की।

चर्चा के दौरान रेल मंत्रालय के कार्यकारी निदेशक (प्रोजेक्ट्स मानिटरिंग) अंजुम परवेज, महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट्स) भानु प्रकाश, कार्यकारी अधिकारी (प्रोजेक्ट) जे.एस. महरोक ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की प्रगति के बारे में विस्तार जानकारी दी। इस दौरान खंडूरी ने आधिकारियों को जल्द काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट में गुणवत्ता एवं पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाए।

105 किमी की कुल 17 सुरंगें
railway-tunnel

वार्ता के दौरान रेल अफसरों ने बताया कि ये रेल मार्ग कुल 125 किमी प्रस्तावित है। इसका सर्वे और टेक्निकल वेटिंग का काम पूरा हो चुका है। इस रेल मार्ग में कुल 17 सुरंगें होंगी। इन सुरंगों की कुल लम्बाई 105 किमी है। अतः यह रेल मार्ग का मुख्यतः 85 प्रतिशत भाग सुरंगों से होकर गुजरेगा, इसमें सबसे लंबी सुरंग 15 किमी की है जो देवप्रयाग से मलेथा के बीच होगी।

train

उन्होंने बताया कि यह ब्रॉड गेज सिंगल ट्रैक होगा, जिसमें कि सभी स्टेशनों पर ट्रेनों की पांसिंग का प्रावधान होगा। शुरू में इस ट्रैक पर चार ट्रेने चलाने की योजना है लेकिन यह ट्रैक 16 से 18 ट्रेनों की कैपिसिटी रखता है। खडूरी ने विशेषकर यात्री सुरक्षा, पर्यावरण एवं आधुनिकतम तकनीक पर विशेष ध्यान देने को निर्देशित किया गया। इस पर अधिकारियों द्वारा आधुनिकतम इंतजाम करने की बात की गई।

railway-track1

अभी इस प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरणीय मंजूरी प्रगति पर है तथा इस मंजूरी के बाद काम तेज गति से शुरू होगा। आठ से 10 साल में रेल मार्ग कर्णप्रयाग तक पूरा हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट में रेलवे ने विश्व स्तर की टनलिंग और ब्रिज विशेषज्ञों की सेवाएं ली हैं। खंडूरी ने अधिकारियों को पूर्ण समर्पण एवं गति से कार्य करने को कहा। उन्होंने आश्वस्त किया है कि फंड की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।