टिहरी : 7 घंटे की मशक्कत के बाद आखिरकार वन विभाग ने गुलदार को पकड़ ही लिया

टिहरी जिले में आखिरकार 7 घंटों की मेहनत के बाद डांग गांव के एक निर्माणाधीन भवन में छुपे बैठे गुलदार को बेहोश करने के बाद पकड़ लिया गया। बेहोश होने से पहले वन विभाग को गुलदार ने जमकर छकाया।

हालांकि घटनास्थल के चारों तरफ जमा लोगों की भीड़ के कारण होते शोरगुल के कारण भी गुलदार को पकड़ने में दिक्कतें पेश आईं, लेकिन वन विभाग का कुप्रबंधन भी गुलदार को गिरफ्त में लेने की देरी का कारण बना।

डेढ़ घंटे की देरी से पहुंची ट्रेंकुलाइजर गन और उसे चलाने के विशेषज्ञ व्यक्ति के पहुंचने के कुछ देर बाद गुलदार को बेहोश करने की कवायद तो शुरू हुई, लेकिन मात्र पिंजरे के अलावा अन्य जरूरी संसाधन न होने के कारण ऑपरेशन गुलदार को शुरू करने में खासी देर हुई।

आखिरकार वाल्मीकि युवकों की मदद ली गई और उनके द्वारा जाल उपलब्ध कराने के साथ साहस दिखाते हुए गुलदार को कई बार सही स्थिति में लाने की कोशिशें की गईं। बार-बार गुलदार कभी सीढ़ियों की तरफ तो कभी कमरे की तरफ जाकर खुद को बचाने की कोशिशें करता रहा।

घंटों की मशक्कत के बाद आखिरकार वन विभाग के विशेषज्ञ द्वारा ट्रेंकुलाइज गन से छोड़े गए इंजेक्शन के लगने के कुछ ही देर बाद गुलदार बेहोश हो गया। गुलदार के बेहोश होते ही विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों ने वक्त रहते उसे पिंजरे में कैद कर किया।

पकड़े गए घायल नर गुलदार की उम्र 7-8 साल बतायी जा रही है और उसे पौड़ी ले जाया गया है, जहां से उसके ईलाज के बाद रैस्क्यू सेंटर भेज दिया जाएगा। गुलदार को पकड़ने के बाद लोगों के साथ ही वन विभाग के कर्मचारियों में भी गुलदार के साथ सैल्फी व फोटो खींचने की होड़ लगी रही।

बहरहाल वन विभाग पर नाराज ग्रामीणों का कहना है कि अभी और भी गुलदार क्षेत्र में मौजूद हैं, जिससे खतरा व खौफ बना हुआ है। स्थानीय नागरिक कुलदीप सिंह व बीरेन्द्र धनाई का कहना है कि रविवार रात जब गुलदार बस्ती में पहुंचने के बाद घंटों खेत में दुबका रहा तो वन विभाग के नाम पर मात्र एक डंडा लिए वन दरोगा ही मौके पर मौजूद था।

दूसरी तरफ वन विभाग का कहना है कि ट्रेंकुलाइजर गन डिवीजन में एक ही होने के कारण दिक्कतें आती हैं। डीएफओ पौड़ी वन प्रभाग रमेश चन्द्रा का कहना है कि गुलदार शिकार की तलाश में बस्तियों की ओर आता है, ऐसे में लोगों को अपने आसपास की झाड़ियों को निरंतर काटते रहना चाहिए।