26 जुलाई करगिल शौर्य दिवस : उत्तराखंड के 75 वीर सपूतों ने जान देकर भी बचाई भारत मां की लाज

करगिल युद्ध की विजय दिवस को आज देशभर में वीर सैनिकों के शौर्य को याद करते हुए शौर्य दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। लगभग दो महीने चले करगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी घुसपैठिए सैनिकों को देश की मिट्टी से खदेड़ बाहर किया था। 26 जुलाई 1999 को करगिल युद्ध की समाप्ति की घोषणा की गई थी।

देश के प्रति वफादारी और बलिदान उत्तराखण्ड की माटी में कुछ इस कदर घुला है कि चाहे जंग का कोई भी मोर्चा क्यों हो, वीरभूमि के रणबांकुरों ने हर मोर्चे पर अपना लोहा मनवाया है। फिर चाहे वह आजादी से पहले द्वितीय विश्व युद्द हो, चीन से साथ 1962 की जंग हो या पाकिस्तान के साथ 1971 का युद्ध या फिर करगिल की लड़ाई हो। हर मोर्चे पर उत्तराखंड के जांबाज सैनिकों ने मातृभूमि का सिर कभी झुकने नहीं दिया। भले ही इसके लिए उन्हें अपना सिर ही क्यों न कटवाना पड़ा हो।

शहीद मेजर विवेक गुप्ता, शहीद मेजर राजेश सिंह अधिकारी, शहीद सक्वाड्रन लीड़र राजीव पुंडीर के साथ ही वीरभूमि उत्तराखंड के 75 सपूतों ने करगिल युद्ध में अदम्य साहस के साथ लड़ते हुए वीरगति हासिल की। जंग के मोर्चे पर इन बहादुरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना भारत माता की हिफाजत के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी।

16 से 18 हजार फीट ऊंची चोटियां और चोटियों पर निशाना साधे बैठा ना-पाक दुश्मन, हालात विपरीत, डगर बेहद कठिन, लेकिन अपने हौसले और जज्बे के दम पर भारतीय सेना के वीर जवानों ने न सिर्फ दुश्मन को धूल चटाई, बल्कि उन्हें खदेड़ पर बाहर भी निकालकर उनकी औकात दिखाई।

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अपनी बहादुरी के लिए विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में शुमार भारतीय सेना का अभिन्न हिस्सा रहेउत्तराखंड के 75 वीर सपूत बहादुरी के साथ अंत तक लड़े और जब तक शरीर में खून की एक बूंद भी रही, आखिरी सांस तक उन्होंने दुश्मन का डटकर मुकाबला किया। करगिल युद्ध में शहीद होने वाले उत्तराखंड के 75 जांबाजों में सबसे अधिक 27 सैनिक देहरादून से थे।

करगिल युद्ध में शहीद सैनिकों के परिजनों व वीर नारियों को मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत सम्मानित करेंगे। पूर्व सैनिक कल्याण निदेशालय गांधी पार्क में शौर्य दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है, जिसमें शहीदों के परिजनों व वीर नारियों को आमंत्रित किया गया है। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत करगिल शहीदों की याद में बनाए गए शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही शहीदों के परिजनों को सम्मानित भी करेंगे।