ऐपण : अल्मोड़ा की खूबसूरत विरासत, जो दुनियाभर में फैली है

अल्मोड़ा के ऐपण अपनी खूबसूरती के लिए देश में ही नहीं दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। यहां की संस्कृति और त्योहारों की खुशी का रंग दुनिया में फैला हुआ है। अल्मोड़ा जिले से लोग पलायन करके भले जहां भी चले गए हों, वे अपने साथ ऐपण की अपनी लोककला और लोक संस्कृति को भी साथ ले गए हैं। शायद यही कारण है कि आज दिल्ली-मुंबई और चंडीगढ़ जैसे शहरों में दिवाली के मौके पर रेडीमेड ऐपण की खूब बिक्री होती है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत स्वयं अल्मोड़ा जिले से ताल्लुक रखते हैं, शायद यही कारण है कि उनकी भी ऐपण में खास रुचि है। सीएम ने सभी सरकारी कार्यालयों में ऐपण लगाना जरूरी कर दिया है, जिससे ऐपणों की मांग तेजी से बढ़ गई है। इससे ऐपण बनाने के कार्य में लगी महिलाओं को भी रोजगार मिल गया है।

घर में होने वाले सभी शुभ कार्य के दौरान ऐपण बनाए जाते हैं। दीपावली में लक्ष्मी के आगमन के लिए ऐपण बनाना शुभ माना जाता है। पहले लाल मिट्टी (गेरू) और चावलों को पिसकर ऐपण बनाए जाते थे, अब वक्त बदल चुका है और इस बदलते वक्त के साथ ऐपण बनाने की कला में भी परिवर्तन हुआ है।

Aeipn1

अल्मोड़ा के जिलाधिकारी सविन बंसल ने जिले के दो तीन स्थानों पर ऐपण के लिए निशुल्क दुकानें दे दी हैं। यही नहीं जिला प्रशासन लड़कियों को ऐपण बनाने की निशुल्क ट्रेनिंग भी दे रहा है। वैसे तो कुमाऊं के लोगों ने ही अपनी इस संस्कृति ऐपण को दुनियाभर में पहुंचा दिया है, मुख्यमंत्री हरीश रावत भी इसमें खासी रुचि लेकर अपनी संस्कृति और स्थानीय जनता से जुड़े हुए हैं।

अल्मोड़ा की संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल छोटे स्तर पर शुरू हुई है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अनुसार अक्टूबर में अल्मोड़ा में चेली ऐपण शो का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लडकियों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। यही नहीं, जिला प्रशासन द्वारा ऐपण बेचकर होने वाले लाभांश को उन्ही के खातों में जमा करवाया जा रहा है।

Aeipn

ऐपण बनाने के कार्य में दर्जनों की संख्या में लडकियां और महिलाएं काम कर रही हैं। लोगों ने इस कार्य के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत को धन्यवाद दिया है। पहाड़ों के पलायन को रोकने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चेली ऐपण को प्रोत्साहित किया है। इसके लिए अल्मोड़ा के डीएम सविन बसल ने भी निशुल्क दुकानें देकर महिलाओं का उत्साह बढ़ाया है।

पहाड़ों से पलायन लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में मुख्यमंत्री हरीश रावत से प्रयासों के सफल होने की कामना हर कोई कर रहा है। क्योंकि अगर वे सफल हुए तो गांवों से न सिर्फ पलायन रुकेगा, बल्कि हो सकता है पहाड़ छोड़कर गए लोग फिर से वापस लौट आएं। आज अल्मोड़ा का चेली ऐपण दुनियाभर में प्रसिद्ध होने लगा है।