अब भक्तों को नहीं होंगे गोमुख के दर्शन, तेज बारिश में बह गया गोमुख का मुख

मां गंगा के भक्तों के लिए बुरी खबर है। गंगोत्री धाम में अब गोमुख के दर्शन नहीं हो पाएंगे। तेज बारिश में गोमुख के आकार का बर्फ का जमाव बह गया है। श्रद्धालुओं में गोमुख की बड़ी धार्मिक मान्यता है।

चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु गोमुख के दर्शन के लिए लालायित रहते हैं। साल 2013 की आपदा के दौरान गोमुख में दरारें आ गई थीं। इसके बाद जलवायु परिवर्तन का गोमुख पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इस बारिश में बर्फ की बनी यह आकृति बह गई।

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों ने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में हो रही तेज बारिश के कारण उत्तरकाशी में गंगोत्री ग्लेशियर के गोमुख का मुख बह गया है। आपदा के दौरान इसमें दरारें आ गई थीं, बाद में बर्फ टूटती गई और इस बारिश में यह बह गया है।

ग्लेशियर के मुख्य भाग के सिरे पर गोमुख के आकार का बर्फ का यह जमाव 16-17 जुलाई की बारिश में बहा है। ग्लेशियर का यह सिरा ही गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है। चारधाम आने वाले तीर्थयात्री इसके दर्शन के लिए यहां आते हैं।

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विज्ञानी ग्लेशियर और गोमुख की स्थिति पर बराबर नजर रखे हुए हैं। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के विज्ञानी इसे जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग से जोड़कर देख रहे हैं।

विज्ञानिकों का कहना है कि गोमुख की दरारें फैलती गईं और यह हिस्सा टूटता गया। जलवायु परिवर्तन के कारण यहां बर्फबारी कम होने के साथ ही तापमान में उतार-चढ़ाव अधिक रहा, जिसके कारण बर्फ आइस में नहीं बदल पाई। इससे गोमुख के इस हिस्से में सुधार नहीं हो पाया।

ग्लेशियर का मलबा चीड़बासा और भोजवासा के नालों में पट गया है। इसकी वजह से नालों से पानी उफान मार रहा है। गंगोत्री धाम में सालों बाद भागीरथी शिला से पानी छुआ है। विज्ञानियों का कहना है कि 17 जुलाई को दोपहर 12 बजे पानी शिला तक पहुंचा। केदारनाथ आपदा के दौरान पानी भागीरथी शिला तक नहीं पहुंच पाया था।