परमार्थ निकेतन ने मनाया संस्थापक स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती का 51वां निर्वाण दिवस

ऋषिकेश- परमार्थ निकेतन के संस्थापक ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर श्री स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती जी महाराज का 51वां निर्वाण दिवस आज आश्रम परिसर में धूमधाम से मनाया गया। परमार्थ निकेतन के ऐतिहासिक सत्संग भवन में सम्पन्न हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम में ऋषिकेश एवं हरिद्वार के अनेक सन्तों ने उपस्थित होकर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती को भारत का महान संन्यासी सन्त बताया। इसके साथ ही पिछले पांच दिनों से आश्रम में चल रहे श्रीरामचरितमानस के अखण्ड पाठ सहित विभिन्न कार्यक्रमों का समापन भी हो गया।

वर्ष 1943-44 में स्वर्गाश्रम अंचल में परमार्थ निकेतन के नाम से विशाल आश्रम की स्थापना करने वाले स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती वर्ष 1965 में निर्वाण को प्राप्त हुए थे। आज उनका 51वां निर्वाण दिवस परमार्थ आश्रम में सम्पन्न हुआ। स्वामी शुकदेवानन्द ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती जी महाराज की उपस्थिति में उपस्थित सन्तों ने स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती के महान व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वयोवृद्ध दण्डी स्वामी हंसानन्द ने स्वामी शुकदेवानन्द एवं स्वामी भजनानन्द के संन्यास के अवसर की विशिष्ट घटनाओं का वर्णन किया और कहा कि मैं स्वयं भी उस अवसर पर मौजूद था। ऊँकार को उन्होंने इस जगत की बड़ी शक्ति बताया और उसकी शक्ति की विस्तार से व्याख्या की। परावाणी, पश्यन्ती वाणी, मध्यमा वाणी और बैखरी वाणी और ऊँ के आन्तरिक सम्बन्धों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि ऊँकार का विस्तार ही यह सृष्टि है। उन्होंने कहा कि स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती ने इन आध्यात्मिक शक्तियों को अपने जीवन में गहरे तक उतारा था और अनेकों को उसका लाभ प्रदान किया था।

दैवी सम्पद् मण्डल रायबरेली के अध्यक्ष श्री स्वामी ज्योतिर्मयानन्द सरस्वती के समन्वयन व संचालन में सम्पन्न कार्यक्रम में स्वामी जगदीशानन्द, स्वामी सनातन तीर्थ, स्वामी शिवानन्द, स्वामी केवलानन्द, स्वामी कृष्णानन्द आदि सन्तों ने स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती को 20वीं सदी के महान भारतीय महापुरुष एवं परम तपस्वी सन्त की उपाधि दी। बताया कि आध्यात्मिक महापुरुषों के अलावा देश के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद, राष्ट्रपति सर्वपल्ली डाॅ0 राधाकृष्णन, प्रधानमन्त्री श्री लाल बहादुर शास्त्री, गृहमन्त्री व कार्यवाहक प्रधानमन्त्री श्री गुलजारी लाल नन्दा जैसी अनेक राजनैतिक प्रतिभायें भी उनके श्रीचरणों में बैठने एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रान्त करने ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन आश्रम में आती थीं।

कार्यक्रम में आश्रम के निदेशक राम महेश मिश्र ने गुरुमहिमा पर विशेष कविता का पाठ किया, वहीं आश्रम के गायक कार्यकर्ता दिलीप क्षेत्री ने भजन प्रस्तुत किए। निर्वाण महोत्सव कार्यक्रम में परमार्थ परिवार के सदस्यों, देश के विभिन्न प्रान्तों से आए भक्तों, बड़ी संख्या में सन्तों एवं परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने भी भागीदारी की। कार्यक्रम के उपरान्त सभी सन्तों एवं भक्तों का विशाल भण्डारा भी सम्पन्न हुआ।