कांवड़ यात्रा शुरू होते ही तीर्थनगरी ऋषिकेश से विदाई लेने लगे विदेशी पर्यटक

कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही तीर्थनगरी ऋषिकेश से विदेशी पर्यटक भी विदाई लेने लगे हैं। वजह साफ है और वह है कांवड़ियों की भीड़ से होने वाली अव्यवस्थाएं। जिनमें विदेशी स्वयं को असहज महसूस करते हैं और कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षित शहरों की राह पकड़ लेते हैं।

तीर्थनगरी का ऋषिकेश, मुनिकीरेती व स्वर्गाश्रम क्षेत्र विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा जगह माना जाता है। यही वजह है कि यहां सालभर बड़ी तादाद में विदेशी पर्यटक प्रवास के लिए पहुंचते हैं।

ऋषिकेश के इस पूरे क्षेत्र को विदेशी मेहमान सुरक्षित भी मानते हैं। इतना ही नहीं, यहां अन्य शहरों के मुकाबले पर्यटकों को सस्ता आवास व भोजन भी मिल जाता है। लेकिन, सावन में होने वाली कांवड़ यात्रा विदेशी पर्यटकों के लिए बेहद असहज हो जाती है। कई बार तो कांवड़ यात्रा के दौरान विदेशी पर्यटकों के साथ छेड़छाड़ व नोकझोंक की घटनाएं भी सामने आती हैं। नतीजा, विदेशी यहां से जाने में ही बेहतरी समझते हैं।

इस साल भी कांवड़ यात्रा शुरू होते ही विदेशी मेहमानों ने दूसरे शहरों का रुख करना शुरू कर दिया है। स्थानीय अभिसूचना इकाई विदेशियों की गतिविधियों पर नजर रखती हैं और क्षेत्र में रहने वाले विदेशियों से संबंधित जानकारी भी इकट्ठा करती हैं। इन अभिसूचना इकाई के आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि कांवड़ मेले के साथ अधिकांश विदेशी मेहमान भी तीर्थनगरी से पलायन कर चुके हैं।

भले ही कांवड़ियों की भीड़ विदेशियों को पलायन के लिए मजबूर कर देती हो, मगर यह भी सच है कि कई विदेशी आस्था के इस रंग को भी देखने के लिए लालायित रहते हैं। कई विदेशी तो कांवड़ियों की तरह ही भगवान भोलेनाथ के रंग में रंगे परिधान पहनकर क्षेत्र में घूमते देखे जा सकते हैं। कांवड़ यात्रियों की भीड़ के साथ नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शनों को भी अच्छी-खासी तादात में विदेशी पहुंचते हैं।