हरिद्वार : तमिल कवि तिरूवल्लूवर की प्रतिमा लगाने को लेकर साधु-संतो का विरोध

फोटो साभार - डेक्कन क्रॉनिकल

प्राचीन तमिल कवि तिरूवल्लूवर की प्रतिमा की हरिद्वार में उपेक्षित पड़ी मूर्तियों से दक्षिणी राज्य में भड़क रहे आक्रोश के चलते हरकत में आई उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को उनकी मूर्ति स्थापना के लिए एक सरकारी इमारत में एक उचित जगह तलाशने हेतु एक वरिष्ठ आइएएस अधिकारी को धर्मनगरी भेजा।

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष आर मीनाक्षीसुंदरम ने बताया, ‘मुख्यमंत्री प्रतिमा की स्थापना को लेकर चल रही प्रक्रिया को तेज करना चाहते हैं। मैं आज हरिद्वार जा रहा हूं जहां मैं एक ऐसी उचित जगह की तलाश करूंगा जहां तमिल कवि की प्रतिमा जल्द से जल्द लगाई जा सके।’

यह पूछे जाने पर कि इस प्रक्रिया में कितना समय और लगेगा, इस पर मीनाक्षीसुंदरम ने कहा कि पहले इस संबंध में गंगा सभा और अखिल भारतीय अखाडा परिषद के प्रतिनिधियों को भरोसे में लेकर स्थान तय किया जायेगा और फिर तमिल कवि की प्रतिमा को स्थापित करने के लिए वहां एक आधार खंभे का निर्माण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इसके बाद एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जहां मुख्यमंत्री हरीश रावत और राज्यपाल कृष्णकांत पाल संयुक्त रूप से समारोहपूर्वक प्रतिमा की स्थापना और अनावरण करेंगे। इस संबंध में एक समय सीमा देने से इंकार करते हुए मीनाक्षीसुंदरम ने कहा कि यह सब इस बात पर भी निर्भर करेगा कि मूर्ति के लिए आधारखंभा बनने में कितना समय लगता है।

हालांकि, अधिकारी ने कहा कि गंगा तट पर स्थित सरकारी इमारत ‘मेला भवन’ में मूर्ति लगाने का निर्णय अंतिम है और अब केवल मेला भवन के अदर उस स्थान का फैसला करना बाकी है जहां तिरूवल्लूवर की मूर्ति लगाई जाएगी। मेला भवन कुभ मेला के दौरान नियंत्रण क़क्ष के रूप में काम करता है।

मीनाक्षीसुंदरम ने कहा, ‘वे तिरूवल्लूवर की मूर्ति लगाए जाने के विरोध में कभी नहीं थे। वे सिर्फ उनकी मूर्ति हर की पौड़ी पर लगाने के विरोध में हैं जहां अब तक केवल हिंदू देवी-देवताओं की ही मूर्तियां लगाई गई हैं।’ उन्होंने कहा, ‘उन्हें आशंका है कि घाट पर तिरूवल्लूवर की प्रतिमा लगाए जाने से विभिन्न मतों को मानने वालों से भी इसी प्रकार की मांगें उठने लगेंगी। तमिल कवि की प्रतिमा फिलहाल मेला भवन के मैदान पर खड़ी हुई है।’