गंगा कानून का मसौदा तैयार करने के लिए गठित हुईं दो अलग-अलग समितियां

सरकार ने गंगा कानून का मसौदा तैयार करने के लिए दो अलग-अलग समितियां गठित की हैं। इस कानून का उद्देश्य ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम का तेज गति से क्रियान्वयन और गंगा नदी की सफाई के लिए दिशानिर्देश तैयार करना है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गिरधर मालवीय के नेतृत्व में एक समिति को कानून का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस कानून में गंगा की सफाई और निर्बाध धारा सुनिश्चित करने संबंधी प्रावधान होंगे।

मालवीय (79) गंगा महासभा के प्रमुख हैं, जिसे उनके दादा और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय ने गठित किया था।

समिति में विधायी विभाग के पूर्व सचिव वीके भसीन, आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर एके गोसाई और आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर एन शर्मा सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। इसमें सदस्य सचिव के रूप में ‘नेशनल क्लीन गंगा मिशन’ निदेशक संदीप भी शामिल होंगे।

बयान में कहा गया कि समिति का कार्यकाल तीन महीने का होगा, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है। इसी तरह से, राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के सदस्य माधव चिताले के नेतृत्व में चार सदस्यीय समिति बनाई गई है जो उत्तराखंड के भीमगोड़ा से पश्चिम बंगाल के फरक्का के बीच नदी की सफाई के लिए दिशानिर्देश तैयार करेगी।

जल संसाधन और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालयों के सचिवों को समिति का सदस्य बनाया जाएगा। इसके अलावा पुणे के केन्द्रीय जल एवं ऊर्जा अनुसंधान केन्द्र के निदेशक मुकेश सिन्हा भी इसमें शामिल होंगे।