खुद ही बीमार होकर वेंटीलेटर पर पहुंचा दून मेडिकल कॉलेज, पैसा मिले तो बीमारी कटे

उत्तराखंड का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज, दून मेडिकल कॉलेज आज छोटी-छोटी चीजों के लिए भी मोहताज हो गया है। बजट का न होना या इसकी कमी होना अस्पताल प्रशासन के लिए नासूर बन गया है। एक-एक कर व्यवस्थाएं ठप होती जा रही हैं।

ऐसे में अब अस्पताल की व्यवस्थाएं ‘वेंटीलेटर’ पर हैं और विभागीय अधिकारी अब भी अपनी आपसी तकरार से ही मुक्त नहीं हो पा रहे। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि रजिस्ट्रेशन काउंटर पर प्रिंटर के काट्रेज तक खत्म हो गए हैं, जिसके चलते लोगों के रजिस्ट्रेशन तक नहीं हो पा रहे।

दून व दून महिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल में तब्दील करने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि लोगों को मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं का फायदा मिल सकेगा, लेकिन आज बजट न होने के कारण अस्पताल प्रशासन खुद ही बीमार हो गया है।

पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक व्यवस्थाएं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मे थी, लेकिन अप्रैल में यह चिकित्सा शिक्षा विभाग को मिली। इस बीच बजट के अभाव, टेंडर में देरी व कुछ व्यवस्थागत खामियों के चलते हालात बिगड़ते चले गए। वर्तमान स्थिति यह है कि दवा भी अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग से ऋण के तौर पर लेनी पड़ रही है।

यही नहीं अस्पताल की तंगहाली का असर छोटी-छोटी चीजों पर भी पड़ रहा है। इंटरनेट, फोन, बिजली का बिल व कैंटीन आदि की देनदारी तक चुकाने के लिए अस्पताल प्रशासन के पास पैसे नहीं है। शुक्रवार को हालात यहां तक पहुंच गए कि बकाया बढऩे के कारण काट्रेज रिफिल करने वाली फर्म तक ने हाथ खड़े कर दिए। जिसका सीधा असर अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर देखने को मिला।

प्रिंटर में काट्रेज न होने के कारण यहां दो काउंटर बंद करने पड़े। जबकि अन्य काउंटर पर भी किसी तरह जुगाड़ कर काम चलाया गया। इतना ही नहीं कैश बांधने के लिए रबरबैंड जैसी छोटी चीज भी अस्पताल नहीं खरीद पा रहा है। अस्पताल में ए-4 साइज के पेपर की भी किल्लत है।

यहां तक कि अधिकारी-कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत कोशिशों से काम चला रहे हैं। एमसीआइ के निरीक्षण से अब तक एमएस खुद ही अपनी जेब से तमाम इंतजाम कर रहे हैं। वह करीब डेढ़ लाख रुपये अपनी जेब से लगा चुके हैं। जिसकी वापसी की भी कहीं गुंजाइश नहीं दिख रही।

ये है अस्पताल के खुद बीमार होने की तस्दीक

  • इंटरनेट का बिल न भरने से जन्म प्रमाण पत्र का काम ठप पड़ा
  • कैंटीन, फोन, बिजली आदि की देनदारी बढ़ी
  • फॉर्म एफ भरने का काम ठप हुआ
  • सर्जिकल आइटम और दवा की खरीदारी नहीं हो पा रही
  • अल्ट्रासाउंड रोल तक खत्म होने की कगार पर पहुंचे