अब पहाड़ में इधर-उधर बिखरे हुए खेत नहीं, एक व्यक्ति की जमीन होगी एक जगह, चकबंदी विधेयक पारित

पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को लाभकारी बनाने के लिए राज्य सरकार ने उत्तराखंड जोत चकबंदी एवं भूमि व्यवस्था विधेयक शुक्रवार को सदन में पारित कर दिया। हरिद्वार व ऊधमसिंहनगर के साथ ही कुछ पर्वतीय जिलों के मैदानी क्षेत्र इस कानून की परिधि से बाहर रहेंगे।

सदन में पेश विधेयक के बारे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पलायन रोकने के लिए चकबंदी जरूरी है। लेकिन कानून बना देना काफी नहीं। उन्होंने कहा कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अभियान चलाना होगा।

पारित विधेयक का खास पहलू यह है कि इच्छुक ग्रामीण गांव का चकबंदी प्लान खुद तैयार कर सकते हैं। वे चकबंदी के मूल नियमों का पालन करते हुए योजना बनाते हैं तो उन्हें मान्यता दी जाएगी। स्थानीय उपसंचालक-चकबंदी इसे मंजूरी देंगे।

गुरुवार को वित्त मंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश सदन में विधेयक लाई थीं, लेकिन पिछले सत्र में चकबंदी विधेयक सदन में लाया जा चुका था। स्पीकर के निर्देश पर उन्होंने पुराना विधेयक वापस लिया था और नए विधेयक को पुर:स्थापित किया। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने विधेयक पर विचार करने का प्रस्ताव रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था में जोतों की खास भूमिका है। लेकिन पहाड़ में जोतों का बिखराव बड़ी दिक्कत है। बिखरी और अनियंत्रित जोतों को समेटना और उनका विकास करना जरूरी है। पिछले काफी समय से प्रयास चल रहे हैं। अब जाकर विधेयक बन सका है। इसके लिए उन्होंने सदन को बधाई दी।

उन्होंने कहा कि चकबंदी कानून बना देना ही काफी नहीं है। सरकारी सिस्टम की भी अपनी सीमाएं हैं। जनता के सहयोग के बिना कानून प्रभावी नहीं हो पाएगा। इसके लिए बाकायदा एक अभियान की जरूरत है। कोई व्यापक परिषद बने जो अभियान का बीड़ा उठाए।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वह लंबे समय से महसूस कर रहे हैं कि चकबंदी का अलग कैडर होना चाहिए। जमीनों की हदबंदी और पैमाइश जरूरी है। सरहदें नक्शे बनाए जाने हैं। उनका डिजिटलाइजेशन होना है। इसके लिए एक सिस्टम विकसित करना होगा और इस सबके लिए विल पावर सबसे ज्यादा जरूरी है।

उन्होंने कहा कि चकबंदी कानून से राज्य की बिखरी और अनियंत्रित जोतों को व्यवस्थित करने में यदि कामयाब रहे तो इस बात की प्रबल संभावना है कि 2022 में आजीविका की खोज में लोग गांवों का रुख करें। 2019 तक ग्रामीण पलायन थम जाए। उन्होंने राजस्व मंत्री यशपाल आर्य का भी आभार प्रकट किया।