शीशमबाड़ा प्लांट को मिली मंजूरी, देहरादून को मिलेगी कूड़े से मुक्ति, बिजली और खाद

लंबे इंतजार के बाद आखिरकार शीशमबाड़ा प्लांट का रास्ता साफ हो गया है। गुरुवार को सरकार ने प्लांट को मंजूरी दे दी। शुक्रवार को निगम लेटर ऑफ इंटेन्ट (एलओआई) के लिए शासन को पत्र भेज देगा। प्लांट शुरू होने से शहर के तकरीबन 300 टन कूड़े का निस्तारण रोजाना हो सकेगा।

बता दें कि अभी तक शहर के कूड़े के निस्तारण के लिए कोई सटीक व्यवस्था नहीं थी। इसके चलते सारा कूड़ा सहस्त्रधारा रोड स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड में डाला जाता है, लेकिन ग्राउंड आबादी के बीच होने के चलते क्षेत्रवासी लंबे समय से इसका विरोध कर रहे थे। इसके चलते वहां काफी गंदगी फैल रही थी।

हाल ही में क्षेत्रवासियों के आंदोलन के बाद छह दिन तक शहर में कूड़ा नहीं उठाया जा सका। प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद अब शहरवासियों को कूड़े की समस्या से निजात मिल सकेगी। इस कूड़े से निगम खाद और बिजली बनाएगा। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को मेयर विनोद चमोली शीशमबाड़ा प्लांट का निरीक्षण करेंगे। इसके साथ ही वहां अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहेंगे।

शहर के कूड़े के निस्तारण के लिए साल 2008 में नगर निगम ने शीशमबाड़ा प्लांट बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया। लेकिन इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद ट्रंचिंग ग्राउंड क्षेत्रवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील डाल दी।

मामले में सुनवाई होने पर सुप्रीम कोर्ट ने एक साल के अंदर ग्राउंड खाली करने के लिए निर्देश दिए। इस दौरान पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी मिलने के लिए सात माह का समय लगा। वहीं इस बीच जिस कंपनी के साथ टेंडर हुआ था, उसने नुकसान के चलते बैक आउट कर लिया।

जब कंपनी ने लागत बढ़ाने की बात कही तो सरकार इस पर भी राजी नहीं हुई। इसके साथ सरकार ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर एक अलग विभाग बना दिया। इसके चलते सारे प्रोसेस में इतना समय लगा है।