बड़ी उम्मीद लेकर SDM से राहत मांगने गए थे आपदा पीड़ित, मिली फटकार और धमकी

पहाड़ी दरकने से तबाह हुए कुमारखेड़ा गांव के लोग तिल-तिलकर जीने को मजबूर हो रहे हैं। राहत शिविरों में तमाम अव्यवस्थाएं हैं। न खाने को कुछ है और न सोने को ही ठौर-ठिकाना है। बस किसी तरह जीवन बसर कर रहे हैं।

भ्रूख से बिलखते बच्चों ने उन्हें विवश कर दिया। उम्मीद बंधी कि स्थानीय प्रशासन उनकी मद्द करेगा, लेकिन उनकी उम्मीद कुछ देर बाद ही काफूर हो गई। वह एसडीएम के पास गए तो थे इस उम्मीद के साथ कि वह उनकी समस्याएं दूर करेंगे, लेकिन एसडीएम ने संवेदना दिखाने की बजाय उन्हें फटकार लगाई और किसी से भी समस्या का जिक्र न कर राहत कैंपों में चुप-चाप रहने की हिदायत दे डाली। इससे आपदा पीड़ित हताश और निराश हैं। घटना से आक्रोशित पीड‍्तों ने डीएम से गुहार लगाई है

बता दें कि बीती 17 जुलाई को ऋषिकेश-गंगोत्री नेशनल हाईवे पर नरेन्द्रनगर के पास कुमारखेड़ा के ऊपर से पहाड़ी दरक गई थी। इससे कुमारखेड़ा गांव के कई घर क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसके बाद प्रशासन ने करीब 250 लोगों को कुमारखेड़ा गांव से शिफ्ट किया था। आपदा पीडितों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें अन्यत्र शिफ्ट करने के चार दिन बाद भी किसी ने सुध नहीं ली। भंडारे से खाना मंगाकर वह किसी तरह काम चला रहे हैं।

बुधवार को कुमारखेड़ा के आपदा पीड़ित ग्रामीण खाने और रहने को लेकर अपनी आपबीती सुनाने एसडीएम कुष्ण कुमार मिश्र के पास गए। पीड़ित अपनी परेशानियां बता ही रहे थे कि पूरी बात सुनने से पहले ही वह भड़क उठे। आरोप है कि इस दौरान उप जिलाधिकारी ने पीडितों को धमकाया और उनके ऊपर रौब भी झाड़ा। पीडितों की आपबीती सुनने की बजाय उन्हें चुप रहने की धमकी दी गई। एसडीएम के व्यवहार को लेकर आपदा पीडितों में काफी आक्रोश है।

लोग आपदा से तिल-तिल मर रहे हैं और अधिकारी संवेदनहीन बने हुए हैं। पीड़ितों को राहत पहुंचाने की बजाय एसडीएम चुप रहने को धमका रहे हैं। ये कहां की मानवता है। ये कहां की बात है कि एक ओर अपना घर-बार छिन गया और दूसरी ओर राहत मांगी, तो उन्हें फटकारा जा रहा है।

एसडीएम का यह बर्ताव न सिर्फ आपदा पीड़ितों के साथ अमानवीय है बल्कि यह सरकारी सिस्टम की पोल खोलता है। गुस्से में आपा खो बैठे एसडीएम ने मीडिया को भी मार्यादा में रहने की नसीयत दे डाली। हालांकि बाद में अपने गुस्से पर काबू पाते हुए एसडीएम ने कहा कि आपदा पीड़ित आक्रोशित थे, उन्हे वार्ता के बाद मना लिया गया है।

चाहे जो भी हो लेकिन दुख की इस घड़ी में साथ देने की बजाय प्रशासन आपदा पीड़तों को धमकाकर उनके जख्मों को और कुरेदने का ही काम कर रहा है।