डेंगू के प्रकोप में देहरादून, लगातार बढ़ रही बकरी के दूध की मांग

अस्थायी राजधानी देहरादून में जैसे-जैसे डेंगू के मामने बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे बकरी के दूध की बिक्री भी बढ़ रही है। आम धारणा है कि बकरी के दूध से डेंगू बुखार में राहत मिलती है। हालांकि बकरी के दूध से प्लेटलेट बढ़ने को लेकर कोई प्रमाणिकता नहीं मिली है। पपीते की पत्तियों का प्रयोग भी लोग जमकर कर रहे हैं।

अस्थायी राजधानी देहरादून में डेंगू का प्रकोप रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अब तक 84 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में लोग हर वह उपाय आजमा लेना चाहते हैं, जिसके आजमाने से इस बीमारी से उबरने की थोड़ी भी गुंजाइश हो।

डेंगू से लड़ने के लिए लोग पपीते की पत्तियां और बकरी के दूध का इस्तेमाल रहे हैं। इसके चलते इसकी मांग भी बढ़ गई है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा कोई शोध नहीं हुआ है और इसकी सलाह भी नहीं देते हैं। वे कहते कि प्लेटलेट्स में गिरावट आने के दो-तीन दिनों बाद इसमें प्राकृतिक रूप से बढ़ोतरी देखी जाती है।

डॉ. के.के. टम्टा का कहना है कि हरे पौधों और पत्ति‍यों को आहार के रूप में ग्रहण करने के कारण बकरी के दूध में भी औषधीय गुण होते हैं, और यह कई तरह की बीमारियों को दूर करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो बीमारियों से लड़ने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।

विटामिन बी6, बी12, विटामिन डी, फोलिक एसिड और प्रोटीन से भरपूर बकरी का दूध शरीर को पुष्ट कर, एंटी बॉडी को मजबूत करता है। इसलिए जब इसका सेवन किया जाता है तो शरीर को ताकत मिलती है। जिससे लोग ऐसा विश्वास करते हैं कि वे ठीक हो रहे हैं।

पपीते के पत्ते में पेपेन, साइमोपेपेन, सिस्टेटिन, टोकोफेरोल, एस्कॉर्बिक एसिड, फ्लेवोनॉइड्स, साइनोजेनिक ग्लूकोसाइड्स तत्व होते हैं। ये सभी तत्व एंटी इंफ्लैमेटरी एक्टीविटी से जुड़े हैं। यानी शरीर में होने वाले कोशिकाओं के विघटन या वायरस के दुष्प्रभाव को रोकने में प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। ऐसे में जब इसका सेवन किया जाता है तो यह एनर्जी देते हैं।