मसूरी- सचिन तेंदुलकर की ‘सिफारिश’ भी नहीं आई काम, दोस्त संजय नारंग की बढ़ेंगी मुश्किलें

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के दोस्त संजय नारंग की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ मसूरी कैंट बोर्ड की उस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई है, जिसमें लंढौर के डहेलिया बैंक के अवैध निर्माण को गिराने पर लगी रोक हटाने की मांग की गई है।

मसूरी के वीवीआईपी रिसॉर्ट डहेलिया बैंक का विवाद एक बार फिर चर्चा में है। कुछ समय पहले ही रक्षा मंत्री से सचिन तेंदुलकर की ओर से विवादित सम्पत्ति के मामले में सिफारिश से जुड़ी खबरें चर्चा में हैं तो अब हाईकोर्ट ने भी इस मामले की सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बुधवार को मसूरी कैंट बोर्ड की अपील पर सुनवाई करते हुए 28 जुलाई की तारीख तय की है। कैंट बोर्ड की ओर से मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट से भी संजय नारंग को राहत नहीं मिली है, लिहाजा हाईकोर्ट जल्द इस मामले पर सुनवाई पूरी करे। संजय नारंग के अवैध निर्माण को गिराने पर हाईकोर्ट की रोक का दूसरे भी फायदा उठा रहे हैं।

कैंट बोर्ड के अधिवक्ता वीएस अधिकारी के मुताबिक सचिन तेंदुलकर के बिजनेस पार्टनर और दोस्त संजय नारंग ने यह सम्पत्ति किसी आरएल दुग्गन नामक विदेशी नागरिक से खरीदी थी। केन्द्र सरकार के रक्षा मंत्रालय से इस सम्पत्ति का दाखिल-खारिज आज तक नहीं हुआ है।

साल 2009 में निर्माण के लिए मसूरी छावनी परिषद से अनुमति मांगी गई, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने आवेदन रद्द कर दिया गया। पहले देहरादून और फिर हाईकोर्ट की एकलपीठ के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी संजय को राहत नहीं मिली।

साल 2014 में हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका खारिज होने के बाद खंडपीठ में अपील की गई। साथ ही एक विशेष याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी दाखिल की गई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट में लम्बित होने के नाते हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दिसम्बर 2014 में अवैध निर्माण गिराने पर रोक लगा दी थी। तब से विवाद चला आ रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट से भी संजय नारंग को राहत नहीं मिली है।

मसूरी छावनी परिषद ने इस मामले पर मुख्य न्यायधीश केएम जोसेफ और जस्टिस वीके बिष्ट की खंडपीठ में याचिका दाखिल कर निर्माण गिराने पर लगी रोक हटाने की मांग की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 28 जुलाई सुनवाई की तारीख तय कर दी है।