‘हरदा’ के लिए ‘आग का दरिया’ बन सकता है आज से शुरू हो रहा दो दिवसीय विधानसभा सत्र

गुरुवार से शुरू हो रहा विधानसभा का दो दिवसीय सत्र हरीश रावत सरकार के लिए आग का दरिया साबित हो सकता है। क्योंकि बजट सत्र में मार्च से शुरू हुआ विवाद अभी जारी रहने के आसार हैं। यानी बीजेपी ने एक बार फिर अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं।

एक तरफ स्पीकर के खिलाफ 18 मार्च को ही दिए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बीजेपी कार्यवाही कराना चाहती है, तो दूसरी तरफ सरकार के बजट को भी तकनीकी रूप से गलत बताकर विरोध करने के बीजेपी ने संकेत दे दिए हैं।

21 जुलाई से शुरू हो रहा 2 दिन के विधानसभा सत्र के शांतिपूर्ण रहने की उम्मीद कम ही है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर विधानसभा सत्र में पूरा सहयोग करने का भरोसा दिया है, लेकिन साथ ही जनहित के मुद्दे उठाने की मंशा भी जाहिर की है।

दरअसल विपक्ष को लेकर सरकार इसलिए भी चिंता में है, क्योंकि विधानसभा सत्र से पहले मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक में न तो नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट पहुंचे और न ही बीजेपी के किसी दूसरे प्रतिनिधि नेता ने शिरकत की।

हालांकि अपनी चिट्ठी के जरिए नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा को सूचित किया है कि वे अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के चलते सर्वदलीय बैठक में नहीं पहुंच सके और संभवत: 21 जुलाई को विधानसभा के सत्र में भी उपस्थित न रह सकें।

बावजूद इसके विधानसभा का सत्र सरकार के लिए आसान नहीं रहने वाला है। बीजेपी के ज्यादातर सदस्य अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के मुद्दों को लेकर तो सदन में मुखरता दिखाएंगे ही।

विधानसभा सत्र में सबसे पहले स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव का मामला गर्मा सकता है। क्योंकि 18 मार्च को विपक्ष ने स्पीकर पर अविश्वास जाहिर करते हुए प्रस्ताव दिया था, जिसको लेकर बीजेपी मुखर हो रही है। उसका कहना है कि जब तक स्पीकर ही बहुमत हासिल न कर लें, तब तक गोविंद सिंह कुंजवाल को स्पीकर के रूप में बैठने का अधिकार नहीं है, फिर आगे की कार्यवाई तो बाद का काम है।

दूसरी तरफ कार्यमंत्रणा समिति के बीजेपी से सदस्य मदन कौशिक का ये भी कहना है कि बीजेपी का साफ मानना है कि राज्य सरकार का बजट 18 मार्च को ही गिर गया था। ऐसे में विनियोग विधेयक का प्रतिस्थापनी बजट नहीं लाया जा सकता है। पहले सरकार को पुराना बजट वापस लेकर नया बजट पेश करना चाहिए। पुराने विनियोग विधेयक को ही तकनीकी रूप से गलत तरीके से सदन में रखा जा रहा है।

बीजेपी के आरोपों पर स्पीकर कहते हैं कि सदन के अंदर जिन भी प्रस्तावों पर चर्चा होगी नियमों से होगी। साथ ही स्पीकर शुरू से ही कहते आ रहे हैं कि उन्होंने कुछ भी नियमों से बाहर जाकर नहीं किया है। उधर मुख्यमंत्री हरीश रावत भी कह चुके हैं कि जो मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, उस पर विधानसभा में चर्चा नहीं होगी।

उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष सदन के बाहर की राजनीतिक बयानबाजी का प्रभाव सदन की कार्यवाही में नहीं पड़ने देगा। राज्य हित में विकास के एजेंडे पर सदन में चर्चा की उम्मीद है। यानी सरकार के लिए दो दिनों का विधानसभा का सत्र एक आग कर दरिया साबित होने जा रहा है, जिसमें डूबकर हरदा और उनकी सरकार को पार जाना है।