जंगली सूअरों को मारने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, खंडपीठ ने केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस भेजा

जंगली सूअरों को मारने की अनुमति का विवाद अब नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। वन्य जीवों से जुड़ी संस्था पीएफए की ट्रस्टी गौरी मौलेखी ने एक जनहित याचिका दायर कर केन्द्र के नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केन्द्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।

जनहित याचिका में गौरी मौलेखी का कहना है कि बिना किसी ठोस आधार और सर्वे कराए ही राज्य सरकार की ओर से अनुमति मांगी गई थी और केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस पर मंजूरी देते हुए नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है।

बिहार में नीलगाय, हिमाचल प्रदेश में बंदर और उत्तराखंड में जंगली सूअर को मानव जीवन के लिए खतरा मानते हुए मारने की अनुमति दी गई है। पिछले दिनों नीलगाय के मामले पर विवाद खासा चर्चा में रहा। मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित राज्य के हाईकोर्ट में जाने की सलाह देते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया था।

हिमाचल हाईकोर्ट ने पहले बंदरों को मारने पर रोक लगा दी है। ताजा घटनाक्रम में जंगली सूअरों का विवाद भी कोर्ट पहुंच गया है। गौरी मौलेखी का कहना है कि बिहार में नीलगाय के मामले में भी जल्द ही कानून का सहारा लिया जाएगा।