यहां 150 साल से मनाया जा रहा है मछली पकड़ने का पारंपरिक त्योहार मौण

देहरादून जिले में जौनपुर क्षेत्र का ऐतिहासिक मछली पकड़ने का मौण मेला बुधवार को बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। संभवत: देश का यह पहला ऐसा मछली पकड़ने का मेला होगा, जहां एक साथ हजारों की संख्या में लोग एक साथ नदी में मछली पकड़ते हैं।

सन् 1866 में तत्कालीन टिहरी नरेश ने मौण मेला का शुभारंभ किया था। तब से लेकर आज तक निरंतर मछली पकड़ने के लिए मौण मेला आयोजित किया जाता रहा है। मेले में जौनपुर–जौनसार की संस्कृति की झलक एक साथ देखने को मिलती है।

यहां पर प्राकृतिक जड़ी-बूटी टिमरु के पौधे की खाल निकालकर इसे धूप मे सुखाने के बाद उसको घराट में पीसा जाता है। नदी में टिमरु पाउडर को डालने से पहले लोग ढ़ोल दमाऊं की थाप पर जमकर डांस करते हैं। इस पाउडर को नदी में डालते ही मछलियां बेहोश हो जाती हैं और लोग नदी में एक साथ हजारों की संख्या में ऐसे टूट पड़ते हैं जैसे मानो कोई बेशकीमती खजाना मिल गया हो।

मछली पकड़ने के लिए स्थानीय लोग पारंपरिक यंत्र का प्रयोग करते हैं और गांव में पहुंचकर त्योहार मनाते हैं। मौण मेले में सभी उम्र के लोग शिरकत करते हैं और क्षेत्र के युवा आज भी अपनी संस्कृति को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

मौण मेले में तकरीबन 114 से अधिक गांवों के लोग शिरकत करते हैं। साथ ही जौनसार, रंवाई घाटी के लोग शिरकत कर अपनी प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाने के सराहनीय कार्य कर रहे हैं।