नवप्रभात को प्रोटेम स्पीकर बनाने से बीजेपी को ऐतराज, अब राज्यपाल से मिलने जाएंगे विधायक

अविश्वास प्रस्ताव का सम्मान करते हुए विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने अपनी कुर्सी तो छोड़ दी, लेकिन कांग्रेस के ही विधायक नव प्रभात को सदन की कार्यवाही के लिए नामित कर दिया। कुंजवाल के इसी कदम पर बीजेपी को ऐतराज है।

बीजेपी ने अब विधानसभा की कार्यवाही में भाग नहीं लेने का फैसला किया है। अब बीजेपी प्रतिनिधिमंडल सीथे राज्यपाल से मिलेगा। उधर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नियमों का हवाला देते हुए नव प्रभात के चुनाव को सही ठहराया है।

दरअसल नव प्रभात अधिष्ठाता मंडल के वरिष्ठ सदस्य हैं। यह मंडल सदन द्वारा ही गठित है। प्रावधान है कि स्पीकर यदि पीठासीन नहीं हैं तो विधानसभा उपाध्यक्ष या उनकी गैर मौजूदगी में अधिष्ठाता मंडल के वरिष्ठ सदस्य को पीठासीन किया जा सकता है।

अध्यक्ष कुंजवाल ने इसी के आधार पर कार्य किया। लेकिन बीजेपी का मानना है कि यह असामान्य परिस्थिति है। विस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। वह पीठ पर न तो बैठ सकते हैं और न हीं पीठासीन कौन होगा इसका निर्धारण कर सकते हैं।

संविधान का अनुच्छे 180 (2) कहता है कि यदि ऐसी हालत पैदा होती है तो सदन सर्वसम्मति से निर्णय लेगा कि पीठासीन कौन होगा? अपने इसी तर्क के आधार पर बीजेपी विधायकों ने सदन में हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने बयान जारी कर कहा है कि सरकार लोकतंत्र की और लोकतांत्रिक प्रणाली की हत्या करना चाहती है।

उधर, नेता सदन हरीश रावत कहते हैं कि अधिष्ठाता मंडल का गठन सदन ने किया था। इस मंडल में बीजेपी के भी विधायक शामिल हैं। नव प्रभावत निर्विवाद रूप से इस मंडल के वरिष्ठ सदस्य हैं। उन्हें पीठासीन होने में किसी को कोई एतराज नहीं होना चाहिए।