उत्तराखंड बीजेपी ने मांगा विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का इस्तीफा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरुणाचल प्रदेश के मामले में दिए गए निर्णय से उत्साहित बीजेपी ने मंगलवार को उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर राज्य के लिए दिए गए शीर्ष अदालत के फैसले से साफ हो गया है कि अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा होने तक अध्यक्ष सदन के किसी सदस्य को अयोग्य नहीं ठहरा सकते।

राज्य बीजेपी अध्यक्ष अजय भट्ट ने अस्थायी राजधानी देहरादून में जारी एक बयान में हाल में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरुणाचल प्रदेश के संबंध में दिए गए निर्णय को उत्तराखंड के अयोग्य घोषित किए गए विधायकों के लिए संजीवनी बताया और कहा कि इससे अरुणाचल के समान उत्तराखंड में भी घडी की सुइयां उल्टी पीछे घूम सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के परिप्रेक्ष्य में उत्तराखंड के विधायकों के खिलाफ अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल की कार्रवाई के औचित्य पर सवाल उठाते हुए भट्ट ने पूछा कि राज्य विधानसभा के अंदर असंवैधानिक आचरण के लिए अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का निपटारा होने से पहले वह या उपाध्यक्ष कैसे सदस्यों के निष्कासन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

कुंजवाल पर संवैधानिक नियमों को परे रखते हुए असंतुष्ट विधायकों को अयोग्य घोषित कर येनकेन प्रकारेण हरीश रावत सरकार को बचाने का आरोप लगाते हुए भट्ट ने कहा कि कुंजवाल और उपाध्यक्ष अनुसूया प्रसाद मैखुरी दोनों को तत्काल अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र की हत्या का जो अपराध उन्होंने (कुंजवाल और मैखुरी) ने किया है, अपना त्यागपत्र देकर वे उसका आंशिक पश्चाताप तो कर सकते हैं।’ राज्य विधानसभा में गत 18 मार्च को विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की मांग को अस्वीकार किए जाने के बाद 26 बीजेपी विधायकों और तत्कालीन कांग्रेस के नौ बागी विधायकों ने अध्यक्ष कुंजवाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दे दिया था।

हालांकि, इसका निपटारा होने से पहले ही अध्यक्ष कुंजवाल ने नौ बागी कांग्रेस विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी थी।